WHO Summit: पारंपरिक चिकित्सा के लिए दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पुस्तकालय शुरू, पीएम मोदी ने रखा था प्रस्ताव

पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दुनिया का सबसे व्यापक डिजिटल पुस्तकालय शुरू किया है। इसका नाम ट्रेडिशनल मेडिसिन ग्लोबल लाइब्रेरी (टीएमजीएल) रखा गया। बुधवार को नई दिल्ली में पारंपरिक चिकित्सा पर डब्ल्यूएचओ के शुरू हुए तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन में डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर की निदेशक डॉ. श्यामा कुरुविला ने साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोणों और स्वास्थ्य प्रणालियों में उनके एकीकरण पर जोर देते हुए पारंपरिक चिकित्सा को एक बढ़ती हुई वैश्विक प्राथमिकता के रूप में चिह्नित किया। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, 170 से अधिक सदस्य देशों में किसी न किसी रूप में पारंपरिक चिकित्सा का उपयोग किया जाता है। इसके बावजूद यह क्षेत्र लंबे समय से वैज्ञानिक शोध और स्वास्थ्य नीतियों में अपेक्षित स्थान नहीं पा सका। इसी अंतर को पाटने के लिए डिजिटल पुस्तकालय शुरू किया है जो दुनिया भर में प्रचलित आयुर्वेद, योग, पारंपरिक दाई प्रथा, लोक चिकित्सा और अन्य स्वदेशी चिकित्सा प्रणालियों से जुड़े ज्ञान को एक मंच पर लाने के साथ साथ सुरक्षित रखना और सभी के लिए सुलभ बनाने पर काम करेगा। डॉ. श्यामा कुरुविला ने कहा कि यह पहल विश्व स्वास्थ्य संगठन की ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन स्ट्रैटेजी 2025–2034 के अनुरूप है। इसका लक्ष्य पारंपरिक चिकित्सा के लिए मजबूत वैज्ञानिक साक्ष्य, स्थानीय संदर्भों के अनुरूप शोध और आदिवासी व स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के सम्मान को बढ़ावा देना है। डब्ल्यूएचओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2023 में गांधीनगर में आयोजित जी 20 स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक के दौरान कहा था कि पारंपरिक चिकित्सा के लिए एक वैश्विक ज्ञान भंडार बनाना हम सभी का साझा प्रयास होना चाहिए। यही कारण है कि इस पुस्तकालय को भारत में लॉन्च किया गया जो इस दिशा में भारत की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है। 15 लाख से ज्यादा रिकॉर्ड, 194 देशों की जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जानकारी दी है कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म में 15 लाख से अधिक रिकॉर्ड जोड़े गए हैं। इसमें शोध लेख, जर्नल, वीडियो, नीति दस्तावेज और मल्टीमीडिया सामग्री शामिल है। इसके अलावा छह क्षेत्रीय पोर्टल और 194 देशों के अलग-अलग पेज तैयार किए गए हैं। इन देश-विशेष पेजों में नियम-कानून, शोध विश्लेषण, डाटाबेस और पॉडकास्ट जैसी सामग्री उपलब्ध है। आयुर्वेद, योग और पारंपरिक दाई प्रथा पर खास फोकस पुस्तकालय में अलग-अलग विषयों पर विशेष पेज तैयार किए गए जिनमें पारंपरिक दाई प्रथा, आयुर्वेद, योग, इंटीग्रेटेड ऑन्कोलॉजी, इंटीग्रेटेड पीडियाट्रिक्स शामिल हैं। पहला थीमैटिक पेज अमेरिका महाद्वीप में पारंपरिक दाई प्रथा पर तैयार किया है जिसमें अफ्रीकी मूल और आदिवासी दाइयों के अनुभवों को वीडियो और दस्तावेजों के जरिए संजोया गया। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, कम और मध्यम आय वाले देशों के संस्थानों को पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े शोध और साहित्य तक मुफ्त या कम लागत पर पहुंच मिलेगी। डब्ल्यूएचओ ने एक नया ट्रेडिशनल मेडिसिन रिसर्च एनालिटिक्स प्लेटफार्म भी विकसित किया है। भारत की स्वास्थ्य विरासत को मिला निवेश का सहारा वैश्विक सम्मेलन में भारत की स्वास्थ्य विरासत को निवेश का सहारा भी मिला है। केंद्र सरकार की अपील पर डब्ल्यूएचओ ने स्वास्थ्य विरासत नवाचार (एच2आई) पहल के तहत पारंपरिक और एकीकृत चिकित्सा से जुड़े 21 उच्च प्रभाव वाले नवाचारों को वैश्विक मंच दिया है जिसमें कई बड़े भारत के नवाचार शामिल हैं। उन्हें निवेश से जोड़ने और बड़े स्तर पर लागू करने के लिए विशेष कार्यक्रम भी रखा गया। भारत के लिए यह पहल खास अहमियत रखती है, क्योंकि देश में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और लोक चिकित्सा जैसी समृद्ध स्वास्थ्य परंपराएं मौजूद हैं।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 18, 2025, 02:06 IST
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