केंद्रीय बजट 2026-27: बिहार ने उठाई अतिरिक्त ऋण सीमा, उप-कर के विलय और विशेष बाढ़ राहत पैकेज की मांग

आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में बजट-पूर्व परामर्श बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने राज्य से जुड़ी अहम आर्थिक और विकास संबंधी जरूरतों को केंद्र सरकार के समक्ष विस्तार से रखा। बैठक में वित्त विभाग, बिहार के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री भी मौजूद रहे। उप-कर और अधिभार से राज्यों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठा बिहार के वित्त मंत्री ने बैठक में कहा कि कुल कर राजस्व में उप-कर और अधिभार की हिस्सेदारी वर्ष 2011-12 में 10.4 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 13.6 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि उप-कर और अधिभार केंद्र के विभाज्य कोष का हिस्सा नहीं होते, इसलिए बिहार जैसे राज्यों को उनके संवैधानिक हिस्से से वंचित होना पड़ता है। इसी आधार पर उन्होंने उप-कर और अधिभार को विभाज्य कोष में शामिल करने की मांग रखी। अतिरिक्त ऋण सीमा की अनुमति की मांग राज्य के आर्थिक विकास को गति देने के लिए बिहार सरकार ने अतिरिक्त ऋण ग्रहण सीमा की मांग की। वित्त मंत्री ने कहा कि बिहार की प्रति व्यक्ति आय को राष्ट्रीय औसत के बराबर लाने के उद्देश्य से राज्य को सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 2.0 प्रतिशत की अतिरिक्त उधार सीमा दी जानी चाहिए। यह मांग मौजूदा 3 प्रतिशत वार्षिक सीमा के अतिरिक्त रखी गई है, ताकि राज्य बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं में अधिक निवेश कर सके। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज पर जोर उत्तरी बिहार में कोसी, गंडक और बागमती नदियों से हर वर्ष आने वाली भीषण बाढ़ का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने विशेष राहत एवं आपदा-रोधी पैकेज की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सैटेलाइट आधारित पूर्वानुमान, जीआईएस मैपिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाना जरूरी है। इसके साथ ही बाढ़ और सूखे की स्थायी समस्या के समाधान के लिए नदी जोड़ो परियोजना को प्राथमिकता देने की मांग भी रखी गई। यह भी पढ़ें-Bihar Budget:बिहार बजट पेश करने की तैयारी में जुटी नीतीश सरकार, इन चीजों पर फोकस; 2020 से अब तक का गणित देखें कृषि और उद्योगों में तकनीकी निवेश की आवश्यकता बैठक में बिहार की ओर से कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। वित्त मंत्री ने रोजगार सृजन के उद्देश्य से कृषि में एआई, ड्रोन और ब्लॉकचेन आधारित केंद्र प्रायोजित योजनाओं की जरूरत बताई। इसके अलावा राज्य में उपलब्ध जल संसाधनों और कुशल श्रम शक्ति को ध्यान में रखते हुए नए उद्योगों की स्थापना के लिए विशेष सहयोग की मांग की गई, ताकि संतुलित और समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके। केंद्र को सौंपा गया विस्तृत ज्ञापन बैठक के अंत में बिहार के वित्त मंत्री ने राज्य के विकास से जुड़ा एक विस्तृत ज्ञापन केंद्रीय वित्त मंत्री को सौंपा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में बिहार की इन न्यायसंगत मांगों पर सकारात्मक और व्यावहारिक निर्णय लिया जाएगा।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 10, 2026, 21:02 IST
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