Toxic Air: बारिश और बादल को प्रभावित करती है जहरीली हवा, एनसीआर और उत्तर भारत के लिए वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी
एनसीआर से उत्तर भारत के कई शहरी औद्योगिक इलाकों में हर साल वायु प्रदूषण केवल सांस और सेहत का संकट नहीं बनता, बल्कि अब यह सवाल भी तेज हो रहा है कि क्या यह जहरीली हवा मौसम प्रणालियों जैसे पश्चिमी विक्षोभ, बादल बनने की प्रक्रिया और बारिश को भी प्रभावित करती है। वैज्ञानिक अध्ययनों और मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक प्रदूषण निश्चित रूप से स्थानीय और क्षेत्रीय मौसम पर असर डाल सकता है, हालांकि यह असर सीधा बारिश रोक देना जितना सरल नहीं है, बल्कि कई जटिल प्रक्रियाओं के जरिए काम करता है। नासा, विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) और आईपीसीसी की रिपोर्टों के अनुसार वायुमंडल में मौजूद सूक्ष्म कण पीएम 2.5, पीएम 10, ब्लैक कार्बन और सल्फेट एरोसोल सूर्य की किरणों के साथ इंटरैक्ट करते हैं। ये कण कभी सूरज की रोशनी को वापस अंतरिक्ष में रिफ्लेक्ट करते हैं और कभी वातावरण में गर्मी को फंसा लेते हैं। इसका सीधा असर सतह के तापमान, वायुमंडलीय स्थिरता और हवा की ऊर्ध्वाधर गति पर पड़ता है जो बारिश की संभावना तय करने वाले अहम कारक हैं। आईआईटीएम पुणे के एक वरिष्ठ जलवायु वैज्ञानिक बताते हैं, अत्यधिक प्रदूषण से निचली वायुमंडलीय परत ठंडी और ऊपरी परत अपेक्षाकृत गर्म हो सकती है। इससे हवा का ऊपर उठना कमजोर पड़ता है और बादल बनने की प्रक्रिया बाधित होती है। चूंकि पश्चिमी विक्षोभ मूलरूप से बड़े पैमाने की मौसम प्रणाली हैं, जो मध्य एशिया से चलकर उत्तर भारत तक पहुंचती हैं। विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि प्रदूषण इन प्रणालियों को रोक नहीं सकता, क्योंकि इनकी ऊर्जा और संरचना बहुत विशाल होती है। हालांकि, सीएसआईआर और आईआईटी दिल्ली से जुड़े अध्ययनों के अनुसार अत्यधिक प्रदूषित इलाकों में जब पश्चिमी विक्षोभ के साथ नमी आती है, तो एरोसोल कण बादलों की माइक्रोफिजिक्स को बदल सकते हैं। इससे बूंदें छोटी रह जाती हैं, उनका आपस में मिलकर भारी होना धीमा पड़ता है और कई बार बारिश देर से या कम मात्रा में होती है। दिलचस्प तथ्य यह है कि प्रदूषण हमेशा बारिश को कम ही करे, ऐसा जरूरी नहीं। आईआईटी कानपुर और अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के संयुक्त अध्ययन बताते हैं, कुछ परिस्थितियों में एरोसोल कण तूफानी बादलों को अधिक ऊर्जावान बना सकते हैं, जिससे अल्पकालिक लेकिन अत्यधिक वर्षा या ओलावृष्टि की घटनाएं बढ़ सकती हैं। शहरी हीट आइलैंड और प्रदूषण का संयुक्त प्रभाव घनघोर प्रदूषण अक्सर शहरी हीट आइलैंड प्रभाव के साथ जुड़ा होता है। कंक्रीट, वाहन उत्सर्जन और औद्योगिक गतिविधियों से शहरों का तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों से अधिक हो जाता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जब हीट आइलैंड और प्रदूषण मिलते हैं तो स्थानीय हवा की दिशा, नमी का वितरण और बादल बनने की ऊंचाई तक बदल सकती है, जिससे मौसम का पैटर्न अस्थिर हो जाता है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Dec 19, 2025, 06:01 IST
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