मध्य प्रदेश: हर सरकार को बनानी पड़ेंगी लाड़ली बहना जैसी योजनाएं, शिवराज बोले-बहनें नाराज हुई, तो खैर नहीं
मध्य प्रदेश में शुरू हुई लाड़ली बहना योजना के बाद अब देश की हर सरकार को महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता की योजनाएं बनानी पड़ रही हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन जिले के भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-4 के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह योजना वर्तमान में मुख्यमंत्री ने जारी रखी है और भविष्य में भी हर सरकार को इसे जारी रखना पड़ेगा, क्योंकि यदि बहनें नाराज हो गईं तो किसी की खैर नहीं है। मध्य प्रदेश की इस पहल के बाद देश के विभिन्न राज्यों में लाड़की बहना और मैया सम्मान योजना जैसे अलग-अलग नामों से महिलाओं को वित्तीय सहायता दी जा रही है। बहनों को उठानी पड़ती थी परेशानी केंद्रीय मंत्री चौहान ने बचपन के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने महिलाओं को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहते देखा है। एक-दो हजार रुपये के लिए भी गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों की बहनों को परेशानी उठानी पड़ती थी। इसी सोच के साथ उन्होंने लाड़ली बहना योजना की नींव रखी थी, ताकि महिलाओं के हाथ में आर्थिक ताकत आ सके। पैसे मिलने के बाद महिलाओं की सामाजिक और पारिवारिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। अब घर में उनका सम्मान बढ़ा है और परिवार के सदस्य भी उनकी राय को महत्व देने लगे हैं। ये भी पढ़ें-17 बांग्लादेशी नागरिकों का फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाला मुख्य आरोपी गिरफ्तार, बिलासपुर से दबोचा चौहान ने कहा, महिलाओं के राजनीतिक दृष्टिकोण में भी बड़ा परिवर्तन आया है। पहले माना जाता था कि परिवार का मुखिया जिस दल को समर्थन देगा, घर की महिलाएं भी उसी दिशा में मतदान करेंगी। अब स्थिति बदल चुकी है और महिलाएं अपनी निर्णय क्षमता को पहचानकर खुद तय करती हैं कि किसे वोट देना है। उन्होंने एक घटना का उदाहरण भी दिया, जिसमें लाड़ली बहना योजना का लाभ लेने वाली महिला पर एक राजनीतिक दल को वोट देने का दबाव बनाया गया था और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई थी। उस मामले में उन्होंने स्वयं प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। आर्थिक सहायता से आत्मनिर्भरता की ओर संबोधन के दौरान जब केंद्रीय मंत्री ने उपस्थित जनसमूह से पूछा कि 1500 रुपये की वर्तमान राशि को कितना बढ़ाया जाना चाहिए, तो महिलाओं की ओर से 3000 रुपये की मांग उठी। इस पर उन्होंने आश्वस्त किया कि यह राशि धीरे-धीरे 3000 रुपये तक पहुंचेगी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बहनों को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि उन्हें पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। गरीबी को सबसे बड़ा दुख बताते हुए उन्होंने लखपति दीदी अभियान को तेजी से आगे बढ़ाने का आह्वान किया। महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उनकी वार्षिक आय कम से कम 1 लाख रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए बहनों को व्यावसायिक प्रशिक्षण, बैंक से वित्तीय सहयोग और कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे स्वयं का कारोबार शुरू कर सकें। बिजली समस्या और किसानों का प्रशिक्षण भोजपुर क्षेत्र में व्याप्त पानी और बिजली की समस्या को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वे इस विषय पर मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री से सीधी चर्चा करेंगे, ताकि क्षेत्र में पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसके अतिरिक्त किसानों को आधुनिक खेती के गुर सिखाने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। किसानों के एक दल को प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए भुवनेश्वर भेजा गया है। इस प्रशिक्षण यात्रा के दौरान किसानों के आने-जाने, ठहरने और भोजन की पूरी व्यवस्था सरकार की ओर से की गई है, ताकि वे बिना किसी अतिरिक्त खर्च की चिंता किए नई तकनीक और उन्नत कृषि पद्धतियों को आसानी से सीख सकें।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 11, 2026, 15:21 IST
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