Noida News: 76 रियल एस्टेट परियोजनाओं पर यूपी-रेरा की सख्ती

- , ऑडिट रिपोर्ट नहीं देने वाले प्रमोटरों को नोटिस- 15 दिन में रिपोर्ट अपलोड करने का अंतिम मौका-देरी पर 25 हजार रुपये लेट फीस और परियोजना लागत का पांच प्रतिशत तक जुर्माने की चेतावनीमाई सिटी रिपोर्टरग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी-रेरा) ने वित्तीय वर्ष 2024-25 की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट समय पर दाखिल नहीं करने वाले रियल एस्टेट प्रमोटरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। प्राधिकरण ने प्रदेश की 76 ऐसी परियोजनाओं की पहचान की है। जिनके प्रमोटरों ने निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद अपनी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट यूपी-रेरा के वेब पोर्टल पर अपलोड नहीं की। सभी डिफॉल्टर प्रमोटरों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर निर्धारित लेट फीस के साथ रिपोर्ट अपलोड करने का अंतिम अवसर दिया गया है। निर्धारित अवधि में अनुपालन नहीं होने पर परियोजना की अनुमानित लागत के पांच प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है।यूपी-रेरा के अनुसार रेरा अधिनियम के तहत प्रत्येक प्रमोटर के लिए यह अनिवार्य है कि वह प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद परियोजना के खातों का स्वतंत्र ऑडिट कराए और छह महीने के भीतर वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट पोर्टल पर उपलब्ध कराए। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट समय पर दाखिल नहीं करने पर संबंधित वर्ष के लिए 25 हजार रुपये की लेट फीस देनी होगी। बाहरी ऑडिटर से ऑडिट कराना अनिवार्य : यूपी-रेरा ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना के खातों का ऑडिट किसी स्वतंत्र बाहरी ऑडिटर से कराया जाना अनिवार्य है। ऑडिटर प्रमोटर की कंपनी, उसके समूह अथवा उससे जुड़ी किसी संस्था का ऑडिटर नहीं होना चाहिए। इस व्यवस्था का उद्देश्य वित्तीय विवरणों की निष्पक्ष जांच, सही रिपोर्टिंग और परियोजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। प्राधिकरण की सूची में कई ऐसे प्रमोटर शामिल हैं, जिनकी एक से अधिक परियोजनाओं की ऑडिट रिपोर्ट लंबित है। इनमें स्वेकरेटी रेजिडेंसी एलएलपी की वेदांशा ग्रीन्स-1, 2 और 3, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर पार्क प्राइवेट लिमिटेड की द फ्लैगशिप फेज-3 और फेज-4, आराध्यम बिल्डर्स की आराध्यम स्पा सिटी फेज-1 और आराध्यम प्लॉट-सी, महाराजा रियल्टर्स की महाराजा मानसरोवर-1 और 2, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण तथा गोरखपुर विकास प्राधिकरण की विभिन्न योजनाएं और मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की आवासीय योजनाएं शामिल हैं।सबसे अधिक लागत वाली जिन परियोजनाओं की ऑडिट रिपोर्ट अब तक जमा नहीं हुई है। उनमें गौतमबुद्ध नगर की वीवीआईपी एड्रेसेज ग्रेटर नोएडा वेस्ट, सीआरसी मैस्टा, सेंट्रल आइकॉन, सिग्नेचर पार्क, ऐस एस्टेट, एवेन्यू-4, द फ्लैगशिप फेज-4 और ओएसिस ग्रैंडस्टैंड फेज-2 प्रमुख हैं। इनके अलावा गाजियाबाद की मेट्रो सूट्स बेलावी तथा लखनऊ की मिगसन लखनऊ सेंट्रल भी सूची में शामिल हैं। यूपी-रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट समय पर जमा करना प्रत्येक प्रमोटर की मूल कानूनी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण रेरा के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करता रहेगा।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 27, 2026, 20:04 IST
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