Bihar Budget 2026: हर खेत तक पानी से गंगा जल आपूर्ति तक, जल संसाधन विभाग का मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान; जानें

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन आज राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने दोपहर 2 बजे विधानसभा में बजट प्रस्तुत किया। यह विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार सरकार का पहला पूर्ण बजट है, जिस पर राज्य के विकास, रोजगार और बुनियादी ढांचे को लेकर खास उम्मीदें टिकी हुई हैं। सिंचाई और पेयजल सुविधाओं कीमजबूती पर जोर जल संसाधन विभाग द्वारा राज्य में सिंचाई और पेयजल सुविधाओं को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। “हर खेत तक सिंचाई का पानी” योजना के तहत चयनित 604 योजनाओं में से अब तक 597 योजनाएं पूरी कर ली गई हैं, जिससे लगभग 1 लाख 18 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फिर से सिंचाई की सुविधा बहाल की जा चुकी है। इसके अलावा 774 अन्य योजनाओं के माध्यम से लगभग 5.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई पुनर्स्थापन का कार्य चल रहा है, जिनमें से 756 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 5.23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ मिल चुका है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत कोशी-मेची लिंक परियोजना के पहले चरण का कार्य शुरू कर दिया गया है। इस परियोजना की कुल लागत 6,282 करोड़ रुपये है, जिसमें पहले चरण के लिए 2,682 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। पूर्वी कोशी मुख्य नहर के इस कार्य से बाढ़ की समस्या कम होगी और अररिया, किशनगंज, पूर्णिया तथा कटिहार जिलों के करीब 2.15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। बांका और मुंगेर जिलों में बाढ़ के समय गंगा नदी के अतिरिक्त जल को बदुआ और खड़गपुर जलाशयों में भेजने का कार्य 1,866 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। इससे इन दोनों जिलों के लगभग 51 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलेगा। जमुई जिले में बरनार जलाशय योजना पर 2,579 करोड़ रुपये की लागत से काम चल रहा है। इस योजना के पूरा होने पर जिले के लगभग 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। गोपालगंज, सिवान और सारण जिलों में पश्चिमी गंडक नहर प्रणाली के पुनर्स्थापन और लाइनिंग का कार्य किया जा रहा है। इस योजना पर 2,061 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिससे लगभग 1.58 लाख हेक्टेयर नई सिंचाई क्षमता का सृजन और 1.47 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का पुनर्स्थापन होगा। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत गंगा जल आपूर्ति योजना के दूसरे चरण में नवादा और बिहारशरीफ शहर को गंगा जल उपलब्ध कराने के लिए मधुबन जलाशय का निर्माण 1,110 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। पेयजल के लिए तय की गई1,347 करोड़ रुपये की लागत इसी अभियान के अंतर्गत औरंगाबाद, डिहरी और सासाराम शहरों को सोन नदी के सतही जल से पेयजल उपलब्ध कराने का कार्य 1,347 करोड़ रुपये की लागत से प्रगति पर है। वहीं भभुआ और मोहनियां शहरों को दुर्गावती जलाशय से पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 198 करोड़ रुपये की योजना पर भी काम चल रहा है। वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में घोषित पश्चिमी कोसी नहर परियोजना का पहला चरण शुरू कर दिया गया है। इस परियोजना की कुल लागत 7,832 करोड़ रुपये है, जिसमें पहले चरण के लिए 3,484 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इस योजना से दरभंगा और मधुबनी जिलों के कुल 36 प्रखंडों को लाभ मिलेगा और इसे मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य में बाढ़ से सुरक्षा के लिए नदियों के किनारे बने तटबंधों और संवेदनशील इलाकों में कुल 216 कटाव निरोधक और बाढ़ सुरक्षा योजनाओं को आगामी मानसून से पहले पूरा करने का लक्ष्य है। इन योजनाओं पर कुल 447 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा विश्व बैंक की सहायता से “बिहार जल सुरक्षा एवं सिंचाई आधुनिकीकरण परियोजना” को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना की कुल लागत 4,415 करोड़ रुपये है, जिसमें से 70 प्रतिशत राशि विश्व बैंक से ऋण के रूप में प्राप्त की जाएगी। इससे राज्य की जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाया जाएगा।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 03, 2026, 13:39 IST
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