Shimla: डॉ. मनीषा थपलियाल बोलीं- हिमालय के संरक्षण बिना विकास अधूरा
हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और सतत विकास की आवश्यकता को लेकर बुधवार पंथाघाटी स्थित हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान में तीन दिवसीय कृषि, बागवानी, वानिकी और संबद्ध विज्ञान पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आईसीएएचएफएएस-2026 शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में संस्थान की निदेशक डॉ. मनीषा थपलियाल ने हिमालय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिमालय केवल भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन, जल स्रोतों और जैव विविधता का आधार है। उन्होंने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच हिमालयी क्षेत्रों में संतुलित और सतत विकास की नीति अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। अनियंत्रित विकास, वनों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन से हिमालय की संवेदनशीलता लगातार बढ़ रही है, जिसका प्रभाव पूरे देश पर पड़ रहा है। डॉ. थपलियाल ने पर्यावरण के लिए जीवनशैली में बदलाव पर बल देते हुए कहा कि संरक्षण केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से संभव है। उन्होंने वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और आम लोगों के बीच बेहतर समन्वय को आवश्यक बताया, ताकि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, शोधकर्ता और शिक्षाविद भाग ले रहे हैं, जो कृषि, बागवानी, वानिकी और संबद्ध विज्ञान के माध्यम से हिमालयी क्षेत्र के सतत विकास पर विचार-विमर्श करेंगे। इस दौरान जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन जैसे विषयों पर विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे। तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में शोध प्रस्तुतियां, विशेषज्ञ व्याख्यान और नीतिगत चर्चाएं होंगी, जिनसे हिमालयी क्षेत्र के लिए नई दिशा तय होने की उम्मीद जताई जा रही है।
Shimla: डॉ. मनीषा थपलियाल बोलीं- हिमालय के संरक्षण बिना विकास अधूरा #VaranasiLiveNews
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 18, 2026, 12:16 IST
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