केंद्रीय बजट को हिमाचल प्रदेश के लिए अत्यंत निराशाजनक : चंद्र कुमार
- कहा, जंगलों का संरक्षण पूरे देश के हित में, आर्थिक भार केवल हिमाचल पर डालना अन्यायपूर्णअमर उजाला ब्यूरोधर्मशाला। कृषि एवं पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार ने धर्मशाला में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की वित्तीय नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। कृषि मंत्री ने केंद्रीय बजट को हिमाचल के लिए अत्यंत निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट में रेलवे विस्तार के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया, पर्यटन सर्किटों को बजट से बाहर रखा गया, कृषि क्षेत्र के लिए अपेक्षित सहायता नहीं दी गई, पर्वतीय विकास की अनदेखी की गई है।उन्होंने कहा कि वर्ष 1952 से भारत में वित्त आयोग की व्यवस्था लागू है, जो भारतीय संविधान के अंतर्गत गठित होती है। इसका उद्देश्य राज्यों की वित्तीय स्थिति का आकलन कर उन्हें न्यायसंगत सहायता प्रदान करना रहा है। हर पांच वर्ष में गठित होने वाला यह आयोग राज्यों में जाकर उनके खर्च, आय के स्रोतों और विशेष परिस्थितियों का अध्ययन करता था। चंद्र कुमार ने कहा कि पहले के वित्त आयोगों ने हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक, पर्यावरणीय और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष सहायता प्रदान की, जिससे राज्य अपने विकासात्मक और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कर सका। हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय हित में ग्रीन फेलिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया। इससे पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की रक्षा और पारिस्थितिकी संतुलन को तो लाभ मिला, लेकिन राज्य की एक बड़ी आय समाप्त हो गई। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने राजस्व हानि की भरपाई के लिए पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जंगलों का संरक्षण पूरे देश के हित में है, लेकिन उसका आर्थिक भार केवल हिमाचल जैसे राज्यों पर डालना अन्यायपूर्ण है।हिमाचल प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र नहीं हैं, उत्पादन सीमित है और जनसंख्या कम होने के कारण जीएसटी और अन्य करों में राज्य का हिस्सा भी कम बनता है। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क, पुल और अन्य आधारभूत ढांचे का निर्माण मैदानी राज्यों की तुलना में कई गुना अधिक महंगा पड़ता है। वर्तमान राज्य सरकार ने शराब पर उपकर सहित अन्य उपायों से लगभग 3 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया है। इस धन का उपयोग किसानों, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के हितों की रक्षा के लिए हर संवैधानिक और लोकतांत्रिक मंच पर अपनी आवाज उठाती रहेगी।अनुराग ठाकुर को दस्तावेज पढ़कर देनी चाहिए प्रतिक्रियाप्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर किया जा रहा है। एक सवाल पर चंद्र कुमार ने कहा कि भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर कभी केंद्रीय वित्त मंत्री नहीं रहे हैं। हवा में तीर मारने के बजाय उन्हें दस्तावेज पढ़कर आंकड़ों के साथ प्रतिक्रिया देनी चाहिए। वहीं, धारा 118 के सवाल पर कृषि मंत्री ने कहा कि इस मामले को सरकार ने स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा हुआ है। सरकार भी इसमें बड़े बदलाव के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि लोग खेतीबाड़ी से जुड़े रहें, इसका खयाल रखना बहुत जरूरी है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 03, 2026, 17:59 IST
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