जमीन से आसमान तक की उड़ान: कौन हैं पायलट निशांत? जिन्होंने बढ़ाया बुंदेलखंड का मान; युवाओं को दिया ये संदेश

निवाड़ी जिले के रहने वाले 33 वर्षीय पायलट कैप्टन निशांत राय आज बुंदेलखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं। उन्होंने न केवल विमान उड़ाकर हजारों फीट ऊपर अपनी पहचान बनाई, बल्कि अपनी मां को 12 ज्योतिर्लिंग और चारों धाम के दर्शन कराकर बेटे के वचन और संस्कार की मिसाल भी कायम की है। अब वे अपने क्षेत्र के बच्चों को पायलट बनने के लिए प्रेरित करने का अभियान चला रहे हैं। कैप्टन निशांत राय ने पत्रकार वार्ता में अपनी संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानी साझा करते हुए बताया कि कभी बुंदेलखंड के बच्चों को आसमान बहुत दूर लगता था, लेकिन अब यहां के युवाओं के सपने भी उड़ान भर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि एक बेटे के वचन, मेहनत और दृढ़ संकल्प की सच्ची उड़ान है। निशांत राय ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा झांसी के आर्मी स्कूल से प्राप्त की और आगे की पढ़ाई भोपाल फ्लाइंग क्लब से की। वर्ष 2012 में उन्होंने पायलट प्रशिक्षण पूरा किया और उच्च प्रशिक्षण के लिए सिंगापुर और बैंकॉक भी गए। वर्ष 2015-16 में उनका चयन एयर इंडिया में हुआ, लेकिन पिता बाबूलाल राय, जो पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष रहे हैं, की तबीयत खराब होने के कारण वे नौकरी जॉइन नहीं कर सके। परिवार को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने यह अवसर छोड़ दिया। इसके बाद वर्ष 2018 में उनका चयन एयर इंडिया, जेट एयरवेज और इंडिगो तीनों एयरलाइनों में हुआ। उन्होंने इंडिगो को जॉइन किया और फर्स्ट ऑफिसर से सीनियर कैप्टन तक का सफर तय किया। ये भी पढ़ें-MP: नागदा को गांव कहने पर अमिताभ बच्चन की बढ़ेंगी मुश्किलें, अदालत ने 9 अप्रैल तक पुलिस से मांगी रिपोर्ट वर्तमान में वे इंडिगो एयरलाइन में मैनेजमेंट से जुड़ी जिम्मेदारियां भी निभा रहे हैं। वे इंदौर-दिल्ली बेस के साथ अहमदाबाद और जयपुर संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब वे पायलट बने थे, उस समय निवाड़ी जिला अस्तित्व में नहीं था और यह टीकमगढ़ का हिस्सा था, इसलिए उन्हें टीकमगढ़ जिले का पहला पायलट माना जाता है। उन्होंने बुंदेलखंड के बच्चों को पायलट बनने की पूरी प्रक्रिया समझाते हुए कहा कि आने वाले समय में एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ेगा और देश में पायलटों की भारी मांग रहेगी। कैप्टन निशांत ने कहा कि नौकरी लगते ही उन्होंने अपनी मां आशा रानी राय को 12 ज्योतिर्लिंग और चारों धाम के दर्शन कराने का संकल्प लिया था, जिसे उन्होंने मात्र दो वर्षों में पूरा कर दिया। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि बड़े शहरों में जाना जरूरी नहीं, बल्कि बड़ा सपना होना चाहिए। “आसमान आपका इंतजार कर रहा है, मेहनत कीजिए और अपने जिले का नाम रोशन कीजिए।”

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 16, 2026, 19:12 IST
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