त्विषा शर्मा केस: पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को झटका, हाईकोर्ट ने जमानत याचिका कर दी खारिज
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मॉडल बहू त्विषाशर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में आरोपी भोपाल की पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि प्रकरण में आरोपी की भूमिका और कथित मानसिक प्रताड़ना से जुड़े पहलुओं की समग्र जांच आवश्यक है। उपलब्ध साक्ष्यों तथा जांच लंबित होने के कारण एकलपीठ ने जमानत देने से इन्कार कर दिया। गौरतलब है कि 12 मई को पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की मॉडल बहू ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर दी थी। पुलिस ने सास तथा पति समर्थ सिंह के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। सास गिरिबाला सिंह को जिला न्यायालय भोपाल से 14 मई को जमानत का लाभ गया था। जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए उनकी अग्रिम जमानत को निरस्त कर दिया था। जिसके बाद प्रकरण को जांच के लिए सीबीआई को सौंपा था। सीबीआई ने आरोपी गिरिबाला सिंह तथा उसके बेटे को गिरफ्तार किया था। ये भी पढ़ें-मध्य प्रदेश: निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश, विधानसभा अध्यक्ष दो महीने में लें फैसला जिला न्यायालय द्वारा जमानत याचिका खारिज होने के कारण उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली थी। जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान उनकी तरफ से तर्क दिया गया था कि कि वह सेवानिवृत्त जिला व सत्र न्यायाधीश है। याचिका में उनकी उम्र तथा बीमारियों को हवाला देते हुए कहा गया कि वह विगत पांच माह से न्यायिक अभिरक्षा में है। सीबीआई ने उनके खिलाफ साक्ष्य नहीं होने के कारण न्यायालय में दहेज एक्ट की धाराओं के तहत चालान पेश नहीं किया है। जांच में याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ है। इसके बावजूद भी उन्हें प्रकरण में आरोपी बनाया गया है। वह निर्दोष हैं और उनके विरुद्ध प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। सीबीआई व राज्य सरकार की तरफ से जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता की तरफ से जांच में सहयोग नहीं किया गया। स्थानीय पुलिस द्वारा बयान दर्ज करवाने के लिए नोटिस जारी किए जाने के बावजूद भी वह उपस्थित नहीं हुईं। इसके अलावा उनके द्वारा साक्ष्यों को मिटाने के प्रयास किए गए। याचिकाकर्ता को जमानत का लाभ प्रदान किया जाता है तो वह साक्ष्यों व गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं। सीबीआई जांच के दौरान जब्त किए गए लैपटॉप, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सहित अन्य तकनीकी साक्ष्यों के रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद प्रकरण में साक्ष्यों के आधार पर धाराओं को जोड़ा जा सकता है। एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद 26 अक्तूबर को फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किए थे। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि मृतका के व्हाट्सऐप संदेश, सीसीटीवी फुटेज और घटना से पहले की परिस्थितियां की जांच आवश्यक है। मृतका के आईफोन से डेटा तथा सीसीटीवी फुटेज की प्रामाणिकता से संबंधित रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। अपराध में आरोपी की भूमिका और कथित मानसिक प्रताड़ना से जुड़े पहलुओं की समग्र जांच आवश्यक है। अपराध की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और आगे की जांच लंबित होने के कारण जमानत याचिका खारिज की जाती है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 04, 2026, 16:18 IST
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