पीलीभीत टाइगर रिजर्व: पुराने कॉरिडोर पर अतिक्रमण से भटक रहे हाथी, आबादी क्षेत्र में पहुंचा रहे नुकसान

नेपाल से तराई के जंगलों में आने वाले हाथियों का पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही और हरीपुर रेंज से दशकों पुराना रिश्ता रहा है। हाथी जंगल में पहुंचने के बाद कुछ दिन विचरण करते थे और फिर वापस चले जाते थे। हालांकि, वर्षों से वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण और मानवीय दखल के कारण हाथियों के आवागमन वाले रास्ते प्रभावित हुए हैं। इससे हाथी भटककर आबादी और खेतों की ओर पहुंचने लगे हैं। शारदा नदी के पार रमनगरा, गुन्हान, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर और भूरा गोरख डिब्बी का क्षेत्र भी हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर के रूप में जाना जाता था। पिछले छह माह से नेपाली हाथियों का बराही, महोफ और माला रेंज के जंगल में चहलकदमी का सिलसिला जारी है। जंगल के अंदर विभागीय संसाधनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वहीं, जंगल से बाहर निकलकर भी हाथी फसलों और झोंपड़ियों को रौंद रहे हैं। हाथियों की निगरानी वन विभाग के लिए चुनौती बनी हुई है। विभाग की ओर से निगरानी के लिए टीमें लगाई गई हैं। डीएफओ भरत कुमार डीके के मुताबिक, हाथियों का रूट तो पुराना है। इसकी पूरी रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है। मुआवजे की प्रक्रिया पर भी अमल किया जा रहा है। वर्तमान में हाथी शारदा पार जा चुके हैं।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 20, 2026, 11:16 IST
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