MP: राजेंद्र माथुर की पत्रकारिता में गांधी के विचारों की झलक, वक्ता बोले- आज भी उनके मूल्यों से सीखने की जरूरत
हिंदी पत्रकारिता के प्रख्यात संपादक और चिंतक राजेंद्र माथुर की 91वीं जयंती पर भोपाल के गांधी भवन न्यास में शुक्रवार को माथुर के महात्मा विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकारों और वक्ताओं ने राजेंद्र माथुर की पत्रकारिता, उनके विचारों और महात्मा गांधी से प्रभावित उनके दृष्टिकोण को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि माथुर के लिए पत्रकारिता केवल खबर देने का माध्यम नहीं, बल्कि सत्य को सामने लाने और समाज को लोकतांत्रिक रूप से मजबूत करने का माध्यम थी। कार्यक्रम की शुरुआत राजेंद्र माथुर के अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर आधारित एक दुर्लभ साक्षात्कार के प्रदर्शन से हुई। इसके बाद महात्मा गांधी और राजेंद्र माथुर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। ये भी पढ़ें-MP News:जनविश्वास का पहला दिन, एक्शन मोड में CM मोहन; शिकायतें सुनीं, CMHO-तहसीलदार समेत 3 अफसर सस्पेंड पत्रकारिता का सबसे बड़ा धर्म सत्य को सामने लाना कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संपादक प्रकाश दुबे ने कहा कि राजेंद्र माथुर पत्रकारिता का सबसे बड़ा धर्म सत्य को निर्भीकता और निर्ममता से सामने लाना मानते थे। उनके व्यक्तित्व में सहजता और वैचारिक दृढ़ता का अद्भुत मेल था। इसकी प्रेरणा उन्हें महात्मा गांधी से मिली थी। उन्होंने माथुर और गांधी से जुड़े कई प्रसंग भी साझा किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि राजेंद्र माथुर आदर्श संपादक थे, लेकिन उनके कई महत्वपूर्ण सपने आज भी अधूरे हैं। वे हिंदी में मजबूत पाठक समाज, पत्रकारिता के विकेंद्रीकरण, भारतीय भाषाओं में सशक्त समाचार-पत्रों और एक सर्वांगीण अखबार की परिकल्पना को साकार करना चाहते थे। इन सपनों को आगे बढ़ाना आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है। ये भी पढ़ें-MP News:निवेशकों की जरूरत से लेकर कर्मचारियों की सुविधाओं तक, मंडीदीप के विकास पर ACS मंडलोई का फोकस अखबार समाज से संवाद का हथियार था मुख्य वक्ता एवं वरिष्ठ संपादक प्रकाश हिंदुस्तानी ने कहा कि माथुर के लिए अखबार सिर्फ सूचना देने का माध्यम नहीं था, बल्कि समाज से संवाद का सशक्त माध्यम था। वे मानते थे कि महात्मा गांधी के अंतिम व्यक्ति की आवाज भी अखबार में जगह पाए। उनके लिए पत्रकारिता का वास्तविक धर्म मानवता था।गांधी भवन न्यास के वरिष्ठ न्यासी महेश सक्सेना ने कहा कि गांधी भवन के मंच पर पत्रकारिता जगत की एक पूरी आकाशगंगा मौजूद है। उन्होंने कहा कि जहां न पहुंचे रवि, वहां पहुंचे पत्रकार।” ये भी पढ़ें-MP News:पीएम मोदी से मिले वीडी शर्मा, खजुराहो के विकास पर चर्चा; बड़ी जिम्मेदारी की अटकलें तेज वरिष्ठ पत्रकारों ने साझा किए संस्मरण वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश मेहता ने कहा कि उनके जीवन में राजेंद्र माथुर का महत्वपूर्ण योगदान रहा और उन्होंने हमेशा उनके सिद्धांतों पर चलने का प्रयास किया। चंद्रकांत नायडू ने कहा कि माथुर में घटनाओं और समाज को गहरी वैचारिक दृष्टि से देखने की क्षमता थी। उन्होंने पत्रकारिता में नई ऊर्जा, गति और वैचारिक गंभीरता का समावेश किया। वरिष्ठ पत्रकार सुधीर सक्सेना ने राजेंद्र माथुर को भारतीय पत्रकारिता का महानायक बताते हुए कहा कि पत्रकारिता में सत्य की प्रतिष्ठा के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। वहीं उमेश त्रिवेदी ने कहा कि माथुर के व्यक्तित्व और पत्रकारिता को समझने के लिए आपातकाल के दौर और उनके जीवन पर पड़े उसके प्रभाव को समझना जरूरी है। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, लेखक, शिक्षाविद् मौजूद रहे। अतिथियों का खादी वस्त्र और राजेश बादल द्वारा लिखित सदी के संपादक राजेंद्र माथुर पुस्तक भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन गांधी भवन न्यास के कोषाध्यक्ष, लेखक एवं पत्रकार राजेश बादल ने किया। न्यास के सचिव अंकित कुमार मिश्रा ने आभार व्यक्त किया।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 07, 2026, 21:18 IST
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