गोपीनाथ मंदिर : यहां गाेपी रूप में पूजे जाते हैं भगवान भोलेनाथ

गोपेश्वर: यहां गाेपी रूप में पूजे जाते हैं भगवान भोलेनाथ- आठवीं शताब्दी में हुआ गोपीनाथ मंदिर का निर्माण, लंबाई में उत्तराखंड के सबसे ऊंचे मंदिरों के तौर पर दर्जप्रमोद सेमवालगोपेश्वर। चमोली जनपद के गोपेश्वर में स्थित विशाल गोपीनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर अनादिकाल से भगवान शिव की तपस्थली रही है। शिवरात्रि के मौके पर यहां मेले का आयोजन होता है। स्थानीय मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण इस स्थान पर गोपियों के साथ रास लीला रचा रहे थे तब भगवान भोेलेनाथ उन्हें देख प्रसन्न हो गए। उनसे रहा नहीं गया और वे भी गोपियों के बीच भाव विभोर होकर नाचने लगे। तब कृष्ण भगवान ने उन्हें पहचान लिया और गोपीनाथ नाम से संबोधित किया। कृष्ण ने भोलेनाथ से जनकल्याण के लिए इस स्थान पर गोपीनाथ के रूप में दर्शन देने की इच्छा जताई थी। तब से यहां देश-विदेश से श्रद्धालु भगवान गोपीनाथ के दर्शनों को पहुंचते हैं। गोपीनाथ मंदिर परिसर में एक विशाल त्रिशूल भी मौजूद है। मान्यता है कि भगवान शिव ने इस त्रिशूल से कामदेव को भस्म किया था। गोपेश्वर निवासी क्रांति भट्ट ने बताया कि स्थानीय मान्यता के अनुसार, गोपीनाथ मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में हुआ था। यह चतुर्थ केदार रुद्रनाथ का शीतकालीन गद्दीस्थल भी है। छह माह रुद्रनाथ भगवान की इसी मंदिर में पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर परिसर में कई शिवलिंग दर्शनीय हैं। चारधाम यात्रा में देश-विदेश के शिवभक्त यहां जल अर्पित कर भगवान शिव के दर्शन करते हैं।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 14, 2026, 12:45 IST
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