Bareilly News: निजी अस्पतालों के आईसीयू की होगी जांच, मानक अधूरे मिले तो पंजीयन होगा निरस्त
बरेली। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर निजी अस्पतालों की आईसीयू सुविधा का निरीक्षण कर मानकों की जांच की जाएगी। मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले अस्पतालों के पंजीयन निरस्तीकरण की कार्रवाई हो सकती है। बुधवार को आईएमए भवन में बैठक के दौरान यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने दी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के निजी चिकित्सकों ने गाइडलाइंस अनुपालन की व्यावहारिक कठिनाइयों को साझा किया।सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह के मुताबिक, आईसीयू संचालन के लिए लेवल-1 के मानकों का पालन अब जरूरी है। इसके लिए अस्पतालों को नौ महीने का मौका मिला है। डॉक्टरों के साथ ही नर्सिंग और तकनीकी स्टाफ की भर्ती छह महीने में पूरी करनी होगी। हर शिफ्ट में डॉक्टर की तैनाती सुनिश्चित करने के साथ नर्स और मरीज का अनुपात 1-2 से 1-3 के बीच रखना होगा।स्वास्थ्य विभाग को तीन दिन में जिले के उन सभी निजी अस्पतालों की सूची बनानी है, जो पंजीकरण, साइनबोर्ड, वेबसाइट, विज्ञापन, आयुष्मान योजना में सूचीबद्ध या बीमा कंपनियों के समक्ष आईसीयू सुविधा का दावा करते हैं। सूची में आईसीयू बेड की संख्या और अस्पताल का घोषित ब्योरा भी दर्ज होगा। एसीएमओ को नोडल अधिकारी नामित कर संयुक्त टीम गठित होगी। चिकित्सकों ने कहा स्पष्ट दिशानिर्देश मिलने पर होगी आसानी गाइडलाइंस के क्रियान्वयन को लेकर हुई बैठक में आईएमए अध्यक्ष डॉ. डीपी गंगवार ने कहा कि गाइडलाइंस का उद्देश्य चिकित्सा सेवा और मरीजों की सुरक्षा बेहतर बनाना है, पर क्रियान्वयन में अस्पतालों की उपलब्ध सुविधा और स्थानीय परिस्थितियों का ध्यान रखना जरूरी है। सचिव डॉ. मोहित अग्रवाल ने कहा, नई व्यवस्था के पालन में चिकित्सकों के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां हैं। शंका समाधान और स्पष्ट दिशानिर्देश मिलने पर ही नियम के तहत कार्य में आसानी होगी। बैठक में डिप्टी सीएमओ डॉ. लईक अंसारी, सीएमओ कार्यालय के डिस्ट्रिक्ट एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. मीसम अब्बास और जिला मलेरिया अधिकारी शैलेंद्र सिंह मौजूद रहे। संक्रमण नियंत्रण से लेकर ब्लड बैंक तक की होगी जांचनिरीक्षण दल अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण, हैंड हाइजीन स्टेशन, जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन, अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन निकास, मरीजों के रिकॉर्ड और ऑडिट व्यवस्था की जांच करेगा। फार्मेसी, 24 घंटे ब्लड बैंक और एंबुलेंस की उपलब्धता परखी जाएगी। कमियां मिलने पर अस्पताल प्रबंधन को नोटिस देकर सात दिन में सुधार संबंधी कवायद लिखित देना होगी। उपकरणों की खरीद के आदेशों की प्रति मांगेंगे।लेवल-2 और लेवल-3 का दावा करने वालों पर भी नजरनिर्धारित मानकों का पालन किए बिना लेवल-2, लेवल-3, क्रिटिकल केयर सेंटर या सुपर स्पेशियलिटी आईसीयू नाम लगाने वाले अस्पतालों को 15 दिन में साइनबोर्ड, वेबसाइट और प्रचार सामग्री में बदलाव करना होगा। निर्धारित समय में लेवल-1 के मानक पूरे नहीं करने वाले अस्पताल आईसीयू के नाम से इकाई संचालित या प्रचारित नहीं कर सकेंगे। आयुष्मान योजना में सूचीबद्ध अस्पतालों की रिपोर्ट साचिस को भी देनी होगी।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 05, 2026, 03:02 IST
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