हिमाचल: अनियंत्रित दोहन से अरलू की प्राकृतिक आबादी पर खतरा, शोध में खुलासा

किन्नौरी टोपी की सजावट से लेकर आयुर्वेदिक दवाओं तक इस्तेमाल होने वाला अरलू अब बढ़ती मांग और अनियंत्रित दोहन के कारण संकट की ओर बढ़ रहा है। मंडी जिले में हुए एक शोध में खुलासा हुआ है कि इसके फलों और बीजों की लगातार तुड़ाई से पौधे का प्राकृतिक पुनर्जनन प्रभावित हो रहा है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते संरक्षण और नियंत्रित दोहन की दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो इसकी प्राकृतिक आबादी पर गंभीर असर पड़ सकता है।आईओएसआर जर्नल ऑफ एनवायरमेंटल साइंस टॉक्सिकोलॉजी एंड फूड टेक्नोलॉजी में प्रकाशित शोध वल्लभ राजकीय महाविद्यालय मंडी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तारा देवी सेन और एचपीयू के प्रो. संजीत सिंह ने किया है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 22, 2026, 08:18 IST
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