High Court : देश के खिलाफ पोस्ट न करने की शर्त पर पाकिस्तान जिंदाबाद पोस्ट करने वाले को हाईकोर्ट से मिली जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाकिस्तान जिंदाबाद लिखकर इंस्टाग्राम पर पोस्ट करने के आरोपी युवक को सख्त शर्तों के साथ जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी सोशल मीडिया पर देश की प्रतिष्ठा या किसी समुदाय के खिलाफ कोई आपत्तिजनक पोस्ट अपलोड नहीं करेगा। यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन किया जाता है तो जमानत निरस्त की जाएगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने आरोपी फैजान की ओर से दायर जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया है। आरोपी के खिलाफ एटा के जलेसर थाने में भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कार्य (पूर्व में लागू राजद्रोह से संबंधित प्रावधान भी शामिल) जैसे गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज हुई थी। आरोपी को तीन मई 2025 में एटा पुलिस ने पहलगाम हमले के बाद अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कथित रूप से पाकिस्तान जिंदाबाद पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि भले ही पोस्ट आपत्तिजनक हो सकती है, लेकिन मामले में बीएनएस की धारा 152 लागू नहीं होती, क्योंकि आरोपी ने भारत के प्रति कोई अपमानजनक या अवमाननापूर्ण टिप्पणी नहीं की। सिर्फ शत्रु देश का समर्थन करना धारा 152 के दायरे में नहीं आता। आरोपी तीन मई 2025 से जेल में निरुद्ध है और जमानत मिलने पर वह स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा। वहीं, राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का विरोध किया। कोर्ट ने शर्तों के साथ आरोपी की जमानत मंजूर कर ली। बीएनएस की धारा 152 इसके तहत भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कार्यों जैसे अलगाववाद, सशस्त्र विद्रोह, विध्वंसक गतिविधियों को अपराध माना जाता है। यह आईपीसी की धारा 124 (ए) राजद्रोह का नया रूप है, जिसमें बोलकर, लिखकर, इलेक्ट्राॅनिक या वित्तीय साधनों से ऐसा करने पर आजीवन कारावास से लेकर सात साल तक की सजा का प्रावधान है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 27, 2026, 20:06 IST
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