High Court : संयुक्त परिवार का हवाला काफी नहीं, सह-काश्तकारी के लिए पैतृक संपत्ति साबित करना जरूरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल संयुक्त हिंदू परिवार के अस्तित्व का दावा करने मात्र से किसी भूमि पर सह-काश्तकारी का अधिकार नहीं मिल सकता। यह सिद्ध करना होगा कि विवादित जमीन वास्तव में पैतृक है। उसका रिकॉर्ड में निरंतर उल्लेख भी रहा है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय की एकल पीठ ने ललितपुर से जुड़े 50 साल पुराने भूमि विवाद मामले की सुनवाई करते हुई की। बंशी गांव निवासी जंकी, भाई लाल और हरिदास ने उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 के तहत वाद दायर कर 27 अन्य लोगों के साथ सह-काश्तकारी घोषित किए जाने की मांग की थी। उनका दावा था कि विवादित भूमि उनके संयुक्त हिंदू परिवार की पैतृक संपत्ति है। ट्रायल कोर्ट ने 1971 में यह कहते हुए वाद खारिज कर दिया था कि पक्षकारों के बीच साझा वंश और पैतृक संपत्ति का संबंध साबित नहीं हुआ। हालांकि, अपर आयुक्त ने 1974 में अपील स्वीकार कर ली थी। बाद में बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने भी उस आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि केवल संयुक्त परिवार की धारणा के आधार पर संपत्ति को संयुक्त पारिवारिक संपत्ति नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अपीलीय प्राधिकारी को बिना ठोस साक्ष्य के इस तरह का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए था। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट डीएल लक्ष्मी व अन्य के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जो व्यक्ति किसी संपत्ति को संयुक्त परिवार का बताता है। उसी पर यह जिम्मेदारी है कि वह इसे सिद्ध करे।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 16, 2026, 15:01 IST
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