Delhi: छह कमरों का बीएंडबी कब बना 26 कमरों का होटल, विभाग को भनक तक नहीं, इसी लापरवाही से होते हैं अग्निकांड
मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे अग्निकांड की जांच ने राजधानी की निगरानी व्यवस्था की गंभीर पोल खोल दी है। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मई 2024 में केवल छह कमरों वाले बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) के रूप में पंजीकृत यह प्रतिष्ठान देखते ही देखते 26 कमरों के होटल में तब्दील हो गया, लेकिन एमसीडी, स्थानीय पुलिस, पर्यटन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों में से किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। इसी प्रशासनिक विफलता का भयावह नतीजा 3 जून को लगी भीषण आग के रूप में सामने आया, जिसमें 23 लोगों की जान चली गई। सूत्रों के अनुसार, पर्यटन विभाग ने तीन अधिकारियों की टीम से निरीक्षण कराने के बाद तीन वर्ष के लिए बीएंडबी लाइसेंस जारी किया था। मौजूदा नियमों के तहत इस अवधि में विभाग के लिए नियमित निरीक्षण अनिवार्य नहीं है। विभाग का कहना है कि यदि किसी अन्य सरकारी एजेंसी से नियम उल्लंघन की सूचना मिलती तो कार्रवाई की जाती, लेकिन विभाग के रिकॉर्ड में ऐसी कोई शिकायत या सूचना दर्ज नहीं है। जांच में सामने आया है कि लाइसेंस मिलने के बाद परिसर में अतिरिक्त मंजिलें और कमरे बनाए गए तथा भूतल पर रसोई भी शुरू कर दी गई। यह बदलाव भवन उपयोग, निर्माण, व्यापार लाइसेंस, अग्नि सुरक्षा और अन्य नियमों के सीधे उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं। इसके बावजूद किसी भी विभाग ने न तो समय रहते कार्रवाई की और न ही पर्यटन विभाग को इसकी जानकारी दी। कई विभागों की जिम्मेदारी, जवाबदेही कहीं नहीं सूत्रों के मुताबिक, होटल के संचालन पर अलग-अलग स्तर पर कई विभागों की निगरानी रहती है। एमसीडी व्यापार और स्वास्थ्य लाइसेंस से जुड़े मामलों का निरीक्षण करती है, जबकि स्थानीय पुलिस होटल में ठहरने वाले लोगों का रिकॉर्ड समय-समय पर जांचती है। विदेशी मेहमानों की जानकारी विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) तक भेजी जाती है। कार्रवाई की घोषणा हुई, अंजाम नहीं मालवीय नगर अग्निकांड और सैदुल्लाजाब इमारत हादसे के बाद जिला प्रशासन और एमसीडी ने राजधानी में अवैध निर्माण और नियमों के विरुद्ध संचालित होटलों के खिलाफ अभियान शुरू किया था। कई इलाकों में होटल और गेस्ट हाउस चिह्नित किए गए, नोटिस जारी हुए और कुछ स्थानों पर अतिक्रमण हटाने की औपचारिक कार्रवाई भी की गई। हालांकि शुरुआती सक्रियता कुछ ही दिनों में ठंडी पड़ गई। सूत्रों के अनुसार, जिन होटलों को नोटिस दिए गए थे, उनमें ज्यादातर मामलों में क्या कार्रवाई हुई, इसका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। जिला प्रशासन भी किसी बड़े होटल के खिलाफ अब तक कठोर कार्रवाई नहीं कर सका है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या हर बड़े हादसे के बाद कुछ दिनों की औपचारिक कार्रवाई ही प्रशासन की स्थायी कार्यशैली बन चुकी है। फ्लोरिश स्टे अग्निकांड की जांच ने स्पष्ट कर दिया है कि विभागों के बीच समन्वय और जवाबदेही की कमी राजधानी में अवैध निर्माण और असुरक्षित होटलों को खुली छूट दे रही है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 05, 2026, 02:38 IST
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