सूख रही दूध की धार: 21वीं पशुगणना के आंकड़े जारी, कुल पशु बढ़े, पर पांच साल में कम हो गईं 66000 भैसें
हाथरस जिले में हुई 21वीं पशुगणना में चौकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। कुल पशु संख्या में तो वृद्धि हुई हैं, लेकिन मुख्य दुधारू पशु भैंसों की संख्या में 66 हजार की कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट बता रही है कि लोगों का पशुपालन से मोह भंग हो रहा है और इसका सीधा असर दूध उत्पादन और आपूर्ति पर भी पड़ेगा। यह इसलिए भी चिंताजनक है कि पशुपालक बिक्री लिहाज से भैंस पालन करते हैं। गायों को लोग अपने घर-परिवार के जरूरत के लिहाज पालते हैं। पशुपालकों के अनुसार भैंस का दूध गाढ़ा होता है और इसमें घी भी इसमें अधिक निकलता है। डेयरियों से लेकर घरों तक इसी मांग ज्यादा होती है।गाय का दूध हल्का होता है, लेकिन स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है। इससे पहले साल 2019 में 20वीं पशुगणना के आंकड़े जारी किए गए थे। 21वीं पशुगणना 25 अक्टूबर 2024 से शुरू होकर अप्रैल 2025 तक चली। अब इसके आंकड़े सामने आए हैं। पांच साल पहले जिले में कुल 6.81 लाख पशु थे, इसमें गाय-भैंस की संख्या 5.25 लाख थीं। बकरी, भेड़, सुअर आदि की कुल संख्या 1.56 लाख थी। इस बार हुई पशु गणना के अनुसार जिले में करीब 7.05 लाख पशु हैं, जिनमें 4.04 लाख भैंस और 1.23 लाख गायें हैं। इस बार गाय, भेड़ और बकरियों की संख्या बढ़ी है। पशुपालन विभाग ने इसका पूरा ब्योरा राज्य सरकार को भेज दिया है। 21वीं पशुगणना पूरी हो चुकी है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। जिले में भैंसों की संख्या में 66 हजार की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। दुधारू पशुओं की संख्या तेजी से कम हो रही है।-डॉ.विजय सिंह यादव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी। अब पशुओं को रखने के लिए जगह नहीं बची है। खेत खाली नहीं रहते, जिससे पशुओं को पेट भरने के लिए चारा नहीं मिल पाता। चारा काफी महंगा हो गया है। इस क्षेत्र में आलू के अलावा अन्य ऐसी फसलें नहीं होतीं, जिनसे सस्ता चारा मिल सके। मजबूरी में बाहर से चारा मंगाना पड़ता है। इसी वजह से कई लोगों ने पशुपालन करना ही बंद कर दिया है।-राम प्रकाश, पशुपालक, सहपऊ। पहले और अब में काफी फर्क आ गया है। पहले गेहूं की फसल कटने के बाद छह महीने तक खेत खाली रहते थे, जिससे गाय-भैंस को चराने में आसानी होती थी। पशु खुले में चरते और चलते थे, जिससे दूध उत्पादन भी अच्छा रहता था। अब कोई भी जमीन खाली नहीं छोड़ता, जिससे पशुओं को चराना एक बड़ी समस्या बन गई है।-श्याम, पशुपालक, दौहई
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Dec 29, 2025, 13:01 IST
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