Siddharthnagar News: मिट्टी कमजोर, डीएपी भी कम, खरीफ सीजन में किसानों की बढ़ी चिंता

87 समितियों पर यूरिया उपलब्ध लेकिन अधिकांश जगह डीएपी का स्टॉक शून्य या बेहद कम मिट्टी में नाइट्रोजन और ऑर्गेनिक कार्बन की कमी, डेढ़ लाख हेक्टेयर धान की खेती के बीच डीएपी का सीमित स्टॉक बढ़ा रहा चिंतासिद्धार्थनगर। जिले में इस खरीफ सीजन में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर में धान की खेती होनी है। रोपाई तेजी से चल रही है। ऐसे समय में हाल में जारी पांच वर्षों की मृदा स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट ने खेती की सेहत को लेकर अहम संकेत दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बर्डपुर और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर जिले के अधिकांश हिस्सों की मिट्टी में नाइट्रोजन और ऑर्गेनिक कार्बन की कमी पाई गई है। ऐसे में किसानों के लिए यूरिया की उपलब्धता राहत देने वाली है लेकिन धान के शुरुआती विकास के लिए जरूरी डीएपी का सीमित स्टॉक उनकी चिंता बढ़ा रहा है। सहकारिता विभाग की छह जुलाई की रिपोर्ट के अनुसार जिले की 10 में से सक्रिय 87 साधन सहकारी समितियों में 27,445 बोरी यूरिया, 2,466 बोरी डीएपी और 6,784 बोरी एनपीके उपलब्ध है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, नाइट्रोजन की कमी दूर करने में यूरिया की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दूसरी ओर धान की रोपाई के समय जड़ों के विकास, पौधों की शुरुआती विकास और अधिक कल्ले बनने के लिए फाॅस्फोरस जरूरी होता है, जिसकी पूर्ति मुख्य रूप से डीएपी से होती है। ऐसे में यूरिया का पर्याप्त स्टॉक राहत तो देता है लेकिन अधिकांश समितियों में डीएपी की कमी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।जिले में यूरिया की उपलब्धता फिलहाल संतोषजनक है। भगौतापुर समिति में सबसे अधिक 1,500 बोरी यूरिया उपलब्ध है। इसके अलावा विश्वनाथगंज में 980 बोरी, विश्वनाथपुर में 860 बोरी, भेंड़ौहा में 850 बोरी, टीकुर में 810 बोरी तथा कई अन्य समितियों में भी पर्याप्त स्टॉक है। इसके विपरीत अधिकांश समितियों में डीएपी का स्टॉक शून्य या बेहद सीमित है।कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मृदा स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार खेतों में केवल नाइट्रोजन नहीं बल्कि संतुलित पोषण की आवश्यकता है। यदि किसान डीएपी के अभाव में केवल यूरिया का प्रयोग करेंगे तो पौधों और जड़ों के शुरुआती विकास पर असर पड़ सकता है। लंबे समय तक असंतुलित उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति और उत्पादकता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।उधर, सहकारिता विभाग का कहना है कि यूरिया की उपलब्धता को लेकर जिले में कोई संकट नहीं है। डीएपी की अतिरिक्त मांग शासन को भेज दी गई है और नई खेप मिलते ही जिन समितियों में कमी है, वहां तत्काल आपूर्ति कराई जाएगी।--------------खेती और खाद का गणित- धान की खेती का लक्ष्य : 1.50 लाख हेक्टेयर- कुल साधन सहकारी समितियां : 87- यूरिया उपलब्ध : 27,445 बोरी- डीएपी उपलब्ध : 2,466 बोरी- एनपीके उपलब्ध : 6,784 बोरी---------------------धान में खाद की भूमिका- यूरिया : नाइट्रोजन की पूर्ति, पौधों की बढ़वार और हरियाली के लिए।- डीएपी : जड़ों का विकास, शुरुआती बढ़वार और अधिक कल्ले बनने के लिए।- एनपीके : फसल को संतुलित पोषण देकर बेहतर उत्पादन में सहायक।----------------डीएपी नहीं मिले तो क्या करें..कृषि विशेषज्ञों की सलाह- एनपीके (12:32:16, 10:26:26 या उपलब्ध ग्रेड) का उपयोग मृदा परीक्षण और कृषि विभाग की अनुशंसा के अनुसार किया जा सकता है।- सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) फाॅस्फोरस का अच्छा विकल्प है। इसके साथ नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए अलग से यूरिया देना पड़ता है।- मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार ही उर्वरकों का चयन करें।- गोबर की सड़ी खाद, वर्मी कंपोस्ट और हरी खाद का प्रयोग बढ़ाएं। इससे जैविक कार्बन बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति सुधरती है।-----------------मृदा परीक्षण के अनुसार संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। नाइट्रोजन की कमी को यूरिया पूरा करता है लेकिन धान की रोपाई के समय फाॅस्फोरस की पूर्ति के लिए डीएपी भी उतना ही जरूरी है। केवल यूरिया के भरोसे बेहतर उत्पादन नहीं लिया जा सकता। - रविशंकर पांडेय, जिला कृषि अधिकारी-----------------जिले की समितियों पर किसानों की मांग के अनुसार यूरिया का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। डीएपी की अतिरिक्त मांग शासन को भेज दी गई है। नई खेप मिलते ही जिन समितियों में कमी है, वहां तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाएगी, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। - प्रकाश बहादुर गौतम, सहायक निबंधक, सहकारिता

#WeakSoilAndAShortageOfDAPHaveHeightenedFarmers'ConcernsForTheKharifSeason. #VaranasiLiveNews

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 09, 2026, 03:02 IST
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