आग लगने पर कुआं खोदने की तैयारी: दिल्ली की प्यास बुझाने पर सरकार ने किया घंटों मंथन, फरमान जारी; मुसीबत तारी
भीषण गर्मी के बीच दिल्लीवासियों की प्यास बुझाना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। इस चुनौती से निपटने के लिए दिल्ली सरकार घंटों मंथन कर रणनीति के तहत काम कर रही है। अब एक-एक बूंद पानी का हिसाब रखा जा रहा है। शनिवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जल मंत्री, दिल्ली जल बोर्ड के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ लंबी बैठक कर मंथन किया कि सीमित संसाधनों के बीच राजधानी के हर इलाके और हर घर तक पानी कैसे पहुंचाया जाए। इस दौरान जल प्रबंधन, रिसाव रोकने, शिकायतों के त्वरित निस्तारण, टैंकर आपूर्ति बढ़ाने और जल संरक्षण के उपायों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी इलाके में पानी की समस्या को हल्के में न लिया जाए। इसमें इस बात पर मंथन किया गया कि बढ़ती गर्मी और सीमित जल उपलब्धता के बीच कैसे हर दिल्लीवासी तक पर्याप्त पानी पहुंचाया जाए। बैठक में जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष सतीश उपाध्याय, सदस्य अजय महावर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। छोटे टैंकरों की संख्या बढ़ा रही सरकार ः भीषण गर्मी के बीच उत्पन्न हालात से निपटने के लिए दिल्ली जल बोर्ड का पूरा तंत्र मैदान में उतर गया है। अधिकारियों के मुताबिक 980 से अधिक जल टैंकर रोजाना 6,000 से ज्यादा फेरे लगा रहे हैं। घनी आबादी और संकरी गलियों वाले इलाकों में छोटे टैंकरों की भी तैनाती की गई है, ताकि पानी उन जगहों तक भी पहुंच सके जहां बड़े वाहन नहीं जा सकते। जल उपलब्धता बढ़ाने के लिए यमुना खादर क्षेत्र में अतिरिक्त बोरवेल लगाए गए हैं। इससे प्रतिदिन 10.5 एमजीडी अतिरिक्त जल उत्पादन क्षमता बढ़ी है। सरकार का मानना है कि यह अतिरिक्त पानी उन इलाकों में राहत पहुंचाने में मदद करेगा जहां मांग अधिक और आपूर्ति कम है। हरियाणा सरकार से न्यूनतम 1000 क्यूसेक पानी की मांग यमुना में वजीराबाद के पास जल उपलब्धता प्रभावित होने से राजधानी की जल आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से बातचीत की। उसके बाद हरियाणा सरकार ने मुनक नहर के माध्यम से दिल्ली को न्यूनतम 1000 क्यूसेक पानी की आपूर्ति बनाए रखने का आश्वासन दिया है। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में जल आपूर्ति व्यवस्था सुचारू हो जाए। लीकेज से पानी की बर्बादी नहीं रुक रही मुख्यमंत्री ने जल रिसाव को सबसे बड़ी चुनौती माना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पाइपलाइन लीकेज और पानी की बर्बादी की हर शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि जब शहर पानी के दबाव से जूझ रहा हो, तब एक बूंद पानी भी व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने शिकायत निवारण व्यवस्था की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में जल बोर्ड हेल्पलाइन पर 11,055 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 8,500 से अधिक का समाधान किया जा चुका है। हरियाणा से पाइपलाइन से पानी लाने की तैयारी बैठक में मौजूदा संकट पर ही नहीं, बल्कि भविष्य की जल जरूरतों पर भी चर्चा हुई। हरियाणा से पाइपलाइन के माध्यम से पानी लाने की संभावना का अध्ययन किया जा रहा है। इस परियोजना की व्यवहार्यता जांच का काम आईआईटी रुड़की कर रहा है। इसके अलावा वजीराबाद के पास यमुना में ड्रेजिंग और डी-सिल्टिंग, नए जल शोधन संयंत्रों की स्थापना तथा अतिरिक्त बोरवेल विकसित करने जैसी योजनाओं पर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है। वाटर सप्लाई सिस्टम पर चर्चा मुख्यमंत्री ने उपचारित पानी के बेहतर उपयोग के लिए रास्ता निकालने की सलाह दी। उन्होंने निर्देश दिए कि चरणबद्ध तरीके से ड्यूल वाटर सप्लाई सिस्टम लागू किया जाए, ताकि एसटीपी से निकलने वाले उपचारित जल का इस्तेमाल बागवानी, वाहन धुलाई और अन्य गैर-पेय कार्यों में हो सके। वर्षा जल संचयन से सरकार को बड़ी उम्मीद मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने बताया कि 75 सीएम श्री स्कूलों में वर्षा जल संचयन संरचनाएं विकसित की जा रही हैं। इसके अलावा 500 नई वर्षा जल संचयन संरचनाओं के निर्माण और 1,000 पुरानी संरचनाओं के पुनरूद्धार की योजना पर काम शुरू हो चुका है। गर्मी के कारण दिल्ली इस समय पानी की सबसे अधिक मांग वाले दौर से गुजर रही है। यमुना में जलस्तर सामान्य से काफी नीचे चला गया है, जिससे कच्चे पानी की उपलब्धता और जल उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद दिल्ली जल बोर्ड ने वैकल्पिक इंतजाम कर रोजाना करीब 900 एमजीडी जल उत्पादन बनाए रखा है। -प्रवेश साहिब सिंह, जल मंत्री संकट का प्रमुख कारण यमुना के ऊपरी क्षेत्र में लंबे समय से बारिश नहीं होने से अभी तक सूखे हुए हैं। इससे जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज हो रही।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: May 31, 2026, 05:43 IST
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