गिरल आंदोलन: 'लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण', भाटी की आत्मदाह की कोशिश पर पर गहलोत-जूली लाल; घिरी भाजपा सरकार

बाड़मेर जिले के गिरल लिग्नाइट माइंस मजदूर आंदोलन को लेकर अब प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में शिव के निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी द्वारा आत्मदाह की कोशिश किए जाने के बाद विपक्ष ने भाजपा सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार की कार्यशैली और मजदूरों की अनदेखी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। अशोक गहलोत ने सरकार पर साधा निशाना विधायक रविंद्र सिंह भाटी के इस कदम के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। गहलोत ने कहा कि गिरल माइंस के मजदूर लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक उनसे बातचीत करना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि विधायक रविंद्र सिंह भाटी को इतना बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में अगर एक विधायक की आवाज को भी नजरअंदाज किया जा रहा है, तो आम जनता की स्थिति का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। अशोक गहलोत ने राज्य सरकार से मजदूरों की मांगों पर तुरंत सकारात्मक निर्णय लेने और जल्द समाधान निकालने की मांग की। टीकाराम जूली ने कहा- लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे विधायक रविंद्र सिंह भाटी को सरकार की लापरवाही और संवेदनहीनता के कारण कलेक्ट्रेट कूच करना पड़ा और वहां अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेलने जैसे कठोर कदम के लिए मजबूर होना पड़ा। जूली ने इसे लोकतंत्र के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में जब एक विधायक की ही यह स्थिति है, तो आम जनता की हालत कितनी दयनीय होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से तुरंत हस्तक्षेप कर मजदूरों से बातचीत करने और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की मांग की। ये भी पढ़ें-गिरल श्रमिक आंदोलन: बुधवार को फिर होगी प्रशासन से वार्ता, भाटी बोले- मांगें पूरी होने तक धरना जारी रहेगा हरीश चौधरी की पोस्ट भी बनी चर्चा का विषय इधर बायतु विधायक हरीश चौधरी की एक सोशल मीडिया पोस्ट भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई। रविंद्र सिंह भाटी की आत्मदाह कोशिश के बाद हरीश चौधरी ने मंगलवार शाम ढलते सूरज की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “थार के धोरों में तपते हुए सूरज की ढलती शाम।” हालांकि उन्होंने अपनी पोस्ट में कहीं भी रविंद्र सिंह भाटी या गिरल आंदोलन का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे इसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। मजदूर आंदोलन बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा फिलहाल गिरल माइंस मजदूरों का आंदोलन अब केवल मजदूरों की मांगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। एक तरफ विपक्ष सरकार को घेरने में जुटा हुआ है, वहीं दूसरी ओर मजदूरों में भी सरकार के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।

#CityStates #Barmer #Rajasthan #BarmerNews #RajsthanNews #VaranasiLiveNews

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 20, 2026, 11:16 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




गिरल आंदोलन: 'लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण', भाटी की आत्मदाह की कोशिश पर पर गहलोत-जूली लाल; घिरी भाजपा सरकार #CityStates #Barmer #Rajasthan #BarmerNews #RajsthanNews #VaranasiLiveNews