Meerut News: यौमे आशूरा पर निकले ताजिए, कर्बला की कुर्बानी को किया याद
लावड़। मुहर्रम की 10 तारीख पर शुक्रवार को लावड़ और आसपास के क्षेत्रों में यौमे आशूरा अकीदत, एहतराम और गमगीन माहौल में मनाया गया। इमामबाड़ों में मजलिसों का आयोजन हुआ। मौलानाओं ने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की कुर्बानी पर रोशनी डाली। अकीदतमंद ताजिए लेकर जुलूस में शामिल हुए। कई स्थानों पर सोगवारों ने मातम किया और जुलूस अपने तय मार्गों से होकर कर्बला पहुंचा। लावड़ के इमामबाड़ा जाकिर अली में मौलाना अली अब्बास ने मजलिस को खिताब किया। बड़े मकान पर मजलिस में मौलाना समद नकवी ने कहा कि कर्बला का पैगाम इंसानियत, सब्र और हक पर डटे रहने की सीख देता है। महलका गांव में भी ताजिया जुलूस अकीदत के साथ निकाला गया। जगह-जगह लोगों ने शरबत और पानी की छबील लगाकर सेवा की। इस दौरान साजिद जैदी, जावेद रजा, तनवीर हसन, अम्मार रजा, शानू, अय्यूब हैदर, अबुल हसन आदि मौजूद रहे।-----------सोगवारों ने जंजीरों से मातम कर किया खुद को लहूलुहान- इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद कर मुहर्रम पर मातमी जुलूस निकालेसंवाद न्यूज एजेंसी सरधना। मुहर्रम की दसवीं तारीख (योमे आशूरा) पर शुक्रवार को सरधना नगर, खिर्वा जलालपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में गम और अकीदत के साथ ताजिए निकाले गए। कर्बला में हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद करते हुए समुदाय के लोगों ने मजलिसों का आयोजन किया, नोहाख्वानी की और मातम किया। नगर के आजाद नगर, चौकड़ा बाजार, स्वामियान, ऊंचापुर और बुद्ध बाजार स्थित इमामबाड़ों में सुबह से मजलिसों का सिलसिला शुरू हो गया। खिर्वा जलालपुर स्थित मुंशीजी के इमामबाड़े में कदीमी मजलिस का आयोजन हुआ। मजलिसों के बाद या हुसैन की सदाओं के बीच ताजियों के जुलूस निकाले गए। जुलूस में शबीहे जुलजनाह की झांकी भी शामिल रही, जिसकी सोगवारों ने जियारत की। कई सोगवार हाथों में तिरंगा लेकर चल रहे थे। कर्बला पहुंचने पर परंपरा के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। कई स्थानों पर अकीदतमंदों ने जंजीरों से मातम और नोहाख्वानी की। आयोजन की व्यवस्थाओं में मंजूर मलिक, ऐनुद्दीन शाह, बंटी कुरैशी, इमरान ठाकुर, शहजाद सितारा, रजा जैदी, शबीउल हसन, मोहम्मद जैदी, इमरान जैदी, शोजी जैदी, बबलू जैदी, फिरोज जैदी, अफसर जैदी, दीन मोहम्मद और मासूम जैदी सहित अन्य लोग सक्रिय रहे। देर रात ताजिए कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक किए गए। -----------सोगवारों ने जंजीरों से मातम कर किया खुद को लहूलुहान कियामवाना। मुहर्रम की दस तारीख को निकले जुलूस ताजिया व जुलजनाह में सोगवारों ने जंजीरों से मातम करके खुद को लहूलुहान कर लिया। सुबह 10 बजे कर्बला में रोजे आशूरा के आमाल हुए उसके बाद 1.30 बजे दोपहर इमाम बारगाह पंजेतनी शाहपुर गढ़ी में मजलिस शुरू हुई, जिसे मौलाना हुसैन मेहंदी ने खिताब फरमाया। मर्सिया ख्वानी मास्टर सरूर इकबाल उर्फ कल्लन ने पेश की। फूल मियां जैदी व मीसम जैदी, कंबर जैदी मोलाई ने निजामत की। मजलिस को खिताब फरमाते हुए मौलाना हुसैन मेहंदी ने इमाम हुसैन के मसायब बयान किए। मजलिस के बाद शबीहे जुलजनाह बरामद हुआ। अलम व जुलजनाह व ताजियों की अकीदतमंदों ने जियारत की। जुलूस पीर सैय्यद इस्माइल कर्बला मुबारिकपुर सड़क पर जाकर समाप्त हुआ। जुलूस में निसार हैदर, रियाज अकबर, इकबाल हैदर, नईम हैदर, आले मेहंदी, अंजुम जैदी, समर अब्बास एडवोकेट, आफताब जैदी, कासिम जैदी, नवाब हैदर, अली अब्बास जैदी हजारों की तादाद में शिया समुदाय के लोग मौजूद रहे। पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि, रहीस आजम, अमीर आजम भूरा, मकसूद अहमद, आस मोहम्मद आदि भी जुलूस में शामिल हुए।-----------इमाम हुसैन को याद कर सोगवारों ने खुद को किया लहूलुहानफलावदा। शहीदे कर्बला की याद में ताजिया व अलम का जुलूस शुक्रवार को निकाला गया। जुलूस के दौरान या हुसैन, या हुसैन की सदाओं से नगर गूंज उठा। आशूरा के दिन नगर में जुलूस निकाला गया। जुलूस अपने-अपने रास्ते से निकलकर कर्बला पहुंचा। सोगवारों ने अपने आप को लहूलुहान किया। कस्बे के मोहल्ला कानी पट्टी स्थित इमामबाड़े में मजलिस आयोजित हुई। मौलाना नईम हैदर ने मजलिस की। नोहाख्वानी रजी अब्बास व अबुल हसन ने की। इस दौरान सदर शाही अब्बास, वाइज अब्बास, डॉ. अली अब्बास, चांद रिजवी, अम्मार रिजवी, कमर अब्बास, नईम हसन, जरी अब्बास, शमीम हसन, नसीम हसन, जफर अब्बास, ओन मोहम्मद आदि मौजूद रहे।-----------इमाम हुसैन को याद कर करते हुए खुद को किया लहूलुहानमुंडाली। मुंडाली में शिया समुदाय के लोगों ने ताजिया जुलूस निकालते हुए मातमपुर्सी करते हुए कर्बला में यजीदियों द्वारा शहीद हुए इमाम हुसैन और उनके साथियों को याद कर मातम करते हुए खुद को छुरियों से लहूलुहान किया। मुख्य इमामबाड़े में तकरीर और मर्सिया कराते हुए मौलाना मेहंदी हसन ने इमाम हुसैन, हजरत अली और उनके साथियों के इस्लाम को बचाने के लिए किए गए संघर्ष और उनकी शहादत को बयां किया गया। जुलूस में अजादार ताजिया और अलम पीछे-पीछे मातम करते हुए चल रहे थे। जुलूस गांव के मुख्य रास्तों से होता हुआ कर्बला के प्रतीक मैदान में पहुंचा जहां पर ताजिया सुपुर्द ए खाक कर दिया गया। इस दौरान हाजी हामिद, तहजीब हसन, जामिन, मोहम्मद रजा, सब्बास, नईम, रजन फरबास, मोहम्मद आलम, हाजी रफीक, मोमीन हसन, वकील, मोहम्मद मेहंदी हसन आदि रहे। लावड़ - लावड़ कस्बे में ताजिया निकालते सौगवार। स्रोत : स्वयं लावड़ - लावड़ कस्बे में ताजिया निकालते सौगवार। स्रोत : स्वयं लावड़ - लावड़ कस्बे में ताजिया निकालते सौगवार। स्रोत : स्वयं लावड़ - लावड़ कस्बे में ताजिया निकालते सौगवार। स्रोत : स्वयं लावड़ - लावड़ कस्बे में ताजिया निकालते सौगवार। स्रोत : स्वयं लावड़ - लावड़ कस्बे में ताजिया निकालते सौगवार। स्रोत : स्वयं लावड़ - लावड़ कस्बे में ताजिया निकालते सौगवार। स्रोत : स्वयं लावड़ - लावड़ कस्बे में ताजिया निकालते सौगवार। स्रोत : स्वयं
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 26, 2026, 17:43 IST
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