Aligarh News: शादी की रस्मों से पहले परंपराओं का रियाज
बदलती जीवनशैली और आधुनिकता के दौर में जहां पारिवारिक परंपराएं धीरे-धीरे सीमित होती जा रही हैं, वहीं शहर की युवतियां विवाह से पहले परंपराओं का रियाज कर रही हैं।घनश्यामपुरी स्थित एक प्रशिक्षण केंद्र में इन दिनों ढोलक की थाप, बन्ना-बन्नी और मांगलिक गीतों की गूंज सुनाई दे रही है। यहां युवतियां ढोलक वादन, पारंपरिक लोकगीत और सांस्कृतिक नृत्य का प्रशिक्षण लेकर शादी से जुड़ी रस्मों और रीति-रिवाजों को सीख रही हैं।प्रशिक्षण केंद्र में विवाह, हल्दी, मेहंदी और अन्य मांगलिक अवसरों पर गाए जाने वाले पारंपरिक लोकगीतों के साथ ढोलक की विभिन्न तालों का अभ्यास कराया जा रहा है। प्रशिक्षकों का कहना है कि पहले बेटियां ये परंपराएं घर-परिवार के बुजुर्गों से सहज रूप से सीख जाती थीं, लेकिन बदलते परिवेश और एकल परिवारों के बढ़ते चलन के कारण अब इसके लिए अलग से प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है। यही वजह है कि विवाह से पहले युवतियां इन कलाओं को सीखकर ससुराल में पारिवारिक और सांस्कृतिक आयोजनों में आत्मविश्वास के साथ भागीदारी निभाना चाहती हैं।प्रशिक्षिका पायल मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में उनके केंद्र पर 10 से 15 युवतियां नियमित प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्हें पारंपरिक विवाह गीत, मंगल गीत, ढोलक वादन और सांस्कृतिक नृत्य की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। उनका कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल कला सिखाना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और लोक परंपराओं से जोड़ना भी है। प्रशिक्षण ले रहीं युवतियां भी पूरे उत्साह के साथ इन विधाओं को सीख रही हैं, ताकि विवाह के बाद वे अपनी सांस्कृतिक पहचान और पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ा सकें।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 16, 2026, 02:21 IST
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