Kurukshetra News: कानूनी पेचीदगियों में फंसा मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान
कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर कानूनी पेचीदगियों के चलते एसजीपीसी व हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के बीच फंसकर रह गया है। दोनों ही संस्थाएं कोई ठोस फैसला नहीं ले पा रही है। 12 मई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के हरियाणा कमेटी के पक्ष में आए आदेशों के बाद एसजीपीसी ने जब अपने हाथ खींच लिए तो चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों के सामने वेतन का संकट खड़ा हो गया। एसजीपीसी की ओर से हाईकोर्ट में पुर्न याचिका डालने के बाद भी हरियाणा कमेटी कोई सार्थक कदम नहीं उठा पा रही है जबकि कमेटी के समक्ष अपनी ही कार्यकारिणी का कोरम पूरा करने का संकट भी कम नहीं हो रहा। ऐसे में चिकित्सक व कर्मचारी पशोपेश में हैं कि आखिर वे किस संस्था के अधीन है और वेतन देने की जिम्मेदारी किनकी है। हालांकि कर्मचारी संघर्ष समिति के जरिए दोनों ही संस्थाओं से गुहार लगा चुके हैं। एक ओर जहां आज न्यायिक आयोग (जुडिशल कमीशन) में सुनवाई निर्धारित है। वहीं ट्रस्ट की ओर से आज कोई न कोई फैसला ले लिए जाने का भरोसा कर्मचारियों को दे चुका है। इसके अलावा 23 जुलाई को हरियाणा कमेटी की कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है, जिसमें पहले बनाई कमेटी के सभी 11 सदस्य उपस्थित रहेंगे। अब सभी की निगाहें इन दोनों दिनों में लिए जाने वाले फैसले पर टिक गई है। उधर 18वें दिन सोमवार को भी चिकित्सकों व अन्य कर्मचारियों का आंदोलन जारी रहा और ओपीडी सेवाएं प्रभावित रही।बॉक्सझींडा बोले, हमारी ही जमीन पर संस्थान, हरियाणा कमेटी ही चलाएगीइस संबंध में एचएसजीएमसी अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए फैसले के अनुसार प्रदेश के सभी संस्थान हरियाणा कमेटी के अधीन है। यह संस्थान भी अब हरियाणा कमेटी ही चलाएगी। इसका फैसला 23 जुलाई को होने वाली बैठक में अहम फैसला लिया जाएगा। झींडा सोमवार को आंदोलन कर रहे चिकित्सकों व अन्य कर्मचारियों के बीच पहुंचे थे। झींडा ने कहा कि 11 सदस्यीय कमेटी एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी से मिल चुकी है। धामी ने कहा कि यदि हरियाणा कमेटी संस्था चलाना चाहती है तो वह चला सकती है। इस दौरान एक एसजीपीसी सदस्य ने हरियाणा कमेटी के लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। झींडा ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पिछले चार माह का बकाया वेतन देना एसजीपीसी का दायित्व है। बॉक्स12 मई के बाद शुरू हुआ वेतन संकट 12 मई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा कमेटी के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके बाद प्रधान जगदीश सिंह झिंडा मीरी-पीरी संस्थान पहुंचे थे और घोषणा की थी कि अब संस्थान का संचालन उनकी कमेटी करेगी। नए बने हालात के बीच मौजूदा प्रबंधन ने वेतन जारी करना बंद कर दिया, जिससे तीन माह से अधिक का वेतन लंबित हो गया और अंततः डॉक्टरों व कर्मचारियों को अनिश्चितकालीन धरने पर बैठना पड़ा। बॉक्स अब जगी उम्मीद : प्रितपालमीरी-पीरी कर्मचारी संघर्ष समिति के प्रधान प्रितपाल सिंह, चिकित्सक डॉ. विपिन भाटिया तथा डॉ. अरविंद टिक्को का कहना है कि हरियाणा कमेटी प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने उम्मीद जगाई कि हरियाणा कमेटी जल्द संस्थान का प्रबंधन संभालेगी और अपने हिस्से का बनता वेतन भी जारी करेगी। उन्होंने कहा कि 12 मई तक का जो वेतन बनता है, उसका भुगतान एसजीपीसी एवं ट्रस्ट प्रबंधन को तत्काल करना चाहिए, जबकि उसके बाद की जिम्मेदारी एचएसजीएमसी स्पष्ट रूप से संभाले।बॉक्सदादूवाल बोले, संस्थान को दोबारा किसी के नियंत्रण में नहीं जाने देंगे हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी धर्म प्रचार के चेयरमैन जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल का कहना है कि संस्था को दोबारा किसी अन्य के नियंत्रण में देने के प्रयास सफल नहीं होने दिए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि बहुत जल्द एचएसजीएसमी मीरी-पीरी संस्थान का संचालन अपने हाथ में लेगी, कर्मचारियों का लंबित वेतन जारी कराया जाएगा और मरीजों की सेवाएं भी निर्बाध रूप से जारी रहेंगी।
#Miri-PiriMedicalInstituteEntangledInLegalComplexities. #VaranasiLiveNews
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 21, 2026, 06:04 IST
Kurukshetra News: कानूनी पेचीदगियों में फंसा मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान #Miri-PiriMedicalInstituteEntangledInLegalComplexities. #VaranasiLiveNews
