Jagdalpur : मोबाइल मेडिकल यूनिट चलित एम्बुलेंस में 3 माह से दवाइयों का टोटा,नहीं लगी सरकारी मुहर

एक ओर सरकार शहरी गरीबों को मुफ्त इलाज और मुफ्त प्रति माह निःशुल्क जरूरी दवाईयों की उपलब्धता का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सुकमा जिले के नगरीय क्षेत्रों में संचालित चलित स्वास्थ्य सुविधा दवाइयों की कमी से जूझ रही है । छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत सुकमा जिले के सुकमा, दोरनापाल और कोन्टा नगर क्षेत्रों में संचालित चलित स्वास्थ्य सुविधा इन दिनों दवाइयों के अभाव से जूझ रही है। स्थिति यह है कि बीते तीन महीनों से बुखार, दर्द और गैस जैसी अन्य कई सामान्य लेकिन आवश्यक दवाइयां भी मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। हालांकि चलित स्वास्थ्य सुविधा प्रत्येक माह निर्धारित समय पर इन क्षेत्रों में पहुंच रही है, लेकिन वाहन में आवश्यक दवाइयों का भंडार नहीं होने के कारण मरीजों को निजी चिकित्सालयों और दवा दुकानों से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। इससे योजना का उद्देश्य अधूरा नजर आ रहा है। इस संबंध में जब चलित चिकित्सा इकाई के प्रभारी एपीएम विवेक बंछोर से चर्चा की गई, तो उन्होंने बताया कि वर्तमान में वे बाहर हैं और धनवंतरी योजना के अंतर्गत लगभग 16 लाख रुपए का भुगतान पिछले तीन महीनों से लंबित है। इसी कारण दवाइयों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि शीघ्र ही बकाया राशि का भुगतान कर दिया जाएगा और एक सप्ताह के भीतर दवाइयों का नया भंडार वाहन में उपलब्ध करा दिया जाएगा। गौरतलब है कि चलित स्वास्थ्य सुविधा का नियमित संचालन, दवाइयों की उपलब्धता तथा समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित प्रभारी अधिकारी की होती है। ऐसे में लगातार तीन महीने तक दवाइयों की कमी कई सवाल खड़े करती है। नॉट फ़ॉर सेल” की मुहर के बिना दवाइयां पारदर्शिता पर सवाल मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत वितरित की जाने वाली दवाइयों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शासन द्वारा खरीदी गई इन दवाइयों पर “शासकीय आपूर्ति – बिक्री हेतु नहीं” की मुहर लगाना अनिवार्य होता है, ताकि इनका निजी दवा दुकानों में दुरुपयोग या बिक्री रोकी जा सके। लेकिन सुकमा जिले में अब तक वितरित की गई किसी भी दवाइयों पर यह मुहर नहीं लगाई जा रही है। जानकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में प्रारंभ हुई इस योजना के तहत शुरू से ही बिना मुहर की दवाइयां वितरित की जा रही हैं। इस मामले पर जब प्रभारी अधिकारी से दूरभाष पर बातचीत की गई, तो प्रभारी विवेक बंछोर ने बताया कि हर दवाई पर मुहर लगाने में काफी समय लगता है । उन्होंने कहा कि इस विषय पर बैठक में चर्चा हुई थी, जिसमें वरिष्ठ प्रबंधक केदार, नवीन और अविनाश द्वारा निर्णय लिया गया कि प्रत्येक दवाई पर मुहर लगाया जा पाना संभव नहीं है “शासकीय आपूर्ति – बिक्री हेतु नहीं” की मुहर लगाने के लिए मना कर दिया गया था। इसी कारण सभी दवाइयों पर मुहर नहीं लगाई जा रही है। ऐसे में दवाइयों के भंडारण, वितरण और संभावित दुरुपयोग को लेकर संदेह और गहरा हो गया है। प्रत्येक माह लाखों रुपए की दवाइयों की खरीदी की जाती है, लेकिन उनका सही तरीके से वितरण हो रहा है या नहीं, यह अब जांच का विषय बनता जा रहा है। photo

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 21, 2026, 14:43 IST
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