Medical Survey: 87 फीसदी रेजीडेंट डॉक्टर बर्नआउट का शिकार, फेमा के सर्वेक्षण में कई चिंताजनक पहलू उजागर

रेजीडेंट डॉक्टरों की कार्यस्थिति और मानसिक स्वास्थ्य पर फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फेमा) की ओर से किए गए रिव्यू मेडिकल सिस्टम (आरएमएस) 2.0 सर्वे में गंभीर तस्वीर सामने आई है।28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,260 रेजीडेंट डॉक्टरों पर किए गए सर्वे में लंबी ड्यूटी घंटे, स्टाफ की कमी, मानसिक तनाव, नींद की कमी और बर्नआउट जैसी समस्याएं बड़े पैमाने पर सामने आई हैं। रिपोर्ट में डॉक्टरों के लिए मानवीय कार्य परिस्थितियां, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और नीतिगत सुधार की तत्काल जरूरत बताई गई है। फेमा ने इससे पहले आरएमएस 1.0 सर्वे के जरिए मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य प्रशिक्षण से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर रिपोर्ट लाई थी। इसमें अनियमित ड्यूटी घंटे, खराब बुनियादी ढांचा, फैकल्टी की कमी, मानसिक स्वास्थ्य सहायता का अभाव, बढ़ते शैक्षणिक दबाव को उजागर किया था। रिपोर्ट में राष्ट्रीय टास्क फोर्स (एनटीएफ) की सिफारिशों को लागू करने की जरूरत बताई गई थी। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर फेमा ने आरएमएस 2.0 सर्वे शुरू किया, जिसमें खास तौर पर रेजीडेंट डॉक्टरों की ड्यूटी, काम का बोझ, बर्नआउट, नींद की कमी, बॉन्ड नीति, स्टाइपेंड और संस्थागत सहायता व्यवस्था का अध्ययन किया गया। सर्वे में 1,260 डॉक्टरों ने भाग लिया।इनमें 1,087 सरकारी मेडिकल कॉलेज, 99 केंद्रीय सरकारी संस्थान, 56 निजी मेडिकल कॉलेज और 18 कॉरपोरेट अस्पतालों के रेजीडेंट डॉक्टर शामिल थे। सर्वे में जूनियर रेजीडेंट, सीनियर रेजीडेंट, नॉन-एकेडमिक रेजीडेंट और इंटर्न शामिल रहे। प्रतिभागी सर्जरी, मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक्स, स्त्री एवं प्रसूति रोग, पीडियाट्रिक्स, एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी, इमरजेंसी मेडिसिन समेत कई विभागों से थे। रिपोर्ट के अनुसार 61.8 प्रतिशत डॉक्टरों ने बताया कि उन्होंने लगातार 36 घंटे से ज्यादा ड्यूटी की है। वहीं, 63.7% डॉक्टरों को 24 घंटे की ड्यूटी के बाद भी अनिवार्य आराम नहीं मिलता। सर्वे में 46.7% डॉक्टरों ने कहा कि वे सप्ताह में 80 घंटे से ज्यादा काम करते हैं। 65 प्रतिशत ने बताई स्टाफ की कमी सर्वे में सामने आया कि 87.5 प्रतिशत डॉक्टर अक्सर या कभी-कभी बर्नआउट महसूस करते हैं। इन डॉक्टरों ने बताया कि ड्यूटी के कारण उन्हें पर्याप्त नींद नहीं मिलती। 54.4 प्रतिशत डॉक्टरों ने कहा कि तनाव और अत्यधिक काम के कारण उन्होंने रेजीडेंसी छोड़ने तक का विचार किया। 16.9 प्रतिशत डॉक्टरों ने माना कि काम के तनाव के कारण उनके मन में खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे विचार आते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 65.7 प्रतिशत डॉक्टरों ने अपने विभाग में स्टाफ की कमी बताई। सर्वे में बॉन्ड नीति और स्टाइपेंड को लेकर भी असंतोष सामने आया।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 28, 2026, 03:26 IST
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