Karur Stampede: करूर भगदड़ मामले में गवाहों को कौन कर रहा प्रभावित? सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, कल सुनवाई
तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट मंगलवार यानी सातजुलाई को एक अहम याचिका पर सुनवाई करेगा। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि मामले के कुछ आरोपी, जो वर्तमान सरकार में मंत्री हैं, गवाहों को सक्रिय रूप से प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने अदालत को बताया कि इस मामले की जांच पहले से सीबीआई कर रही है, लेकिन अब गवाहों पर असर डालने की कोशिश की जा रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को अगले दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। गवाहों को प्रभावित करने का आरोप क्या सुप्रीम कोर्ट की आंशिक कार्यदिवस पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति शील नागू शामिल थे। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता की दलील सुनने के बाद कहा कि इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई की जाएगी। याचिका में कहा गया है कि जिन लोगों पर आरोप हैं, उनमें से कुछ मौजूदा सरकार में मंत्री हैं और वे गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। इसी आधार पर अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। सीबीआई जांच का आदेश क्यों दिया गया था सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्तूबर 2025 को इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि करूर भगदड़ की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है और निष्पक्ष जांच जरूरी है। इस हादसे में 41 लोगों की मौत हुई थी। अदालत ने कहा था कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना न्यायहित में होगा। जांच की निगरानी कौन कर रहा सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच की निगरानी के लिए पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय निगरानी समिति भी बनाई थी। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) और एक सदस्यीय जांच आयोग के आदेशों पर रोक लगाते हुए तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया था कि वह सीबीआई को हर संभव सहयोग दे। यह आदेश मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर दिया गया था। मंगलवार की सुनवाई क्यों अहम मंगलवार को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि गवाहों को प्रभावित करने के आरोपों में कितना दम है और जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाने चाहिए। यदि अदालत को आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर लगते हैं तो वह जांच एजेंसी को आवश्यक निर्देश दे सकती है। इस कारण इस मामले की अगली सुनवाई को करूर भगदड़ जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 06, 2026, 14:01 IST
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