IDFC Bank Scam: आईएएस प्रदीप कुमार और दो बैंक कर्मचारी गिरफ्तार, चार और आईएएस पर लटकी है तलवार
हरियाणा और चंडीगढ़ के सरकारी विभागों के बैंक खातों में हुए 657 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने हरियाणा के आईएएस अधिकारी व हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के तत्कालीन सदस्य सचिव प्रदीप कुमार और दो बैंक अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया। बैंक अधिकारियों को सोमवार देर रात गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी ने मंगलवार को उन्हें अदालत में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया है। सीबीआई के अनुसार जांच में सामने आया है कि प्रदीप कुमार ने एचएसपीसीबी का सदस्य सचिव रहते हुए फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से जुड़े पूरे निवेश कार्य को स्वयं संभाला। उन्होंने निर्धारित सीमा से अधिक राशि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को भेजी। एफडी के लिए एचएसपीसीबी की राशि बिना अनुमति आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खोले गए खाते में भेजी गई। इसके बाद एफडी भी नहीं बनाई गई। इसके बजाय खाते से फर्जी डेबिट ट्रांजेक्शन कर करीब 169 करोड़ रुपये का सरकारी धन गबन कर लिया गया। सीबीआई ने बताया कि प्रदीप कुमार काफी समय से जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और बार-बार प्रयासों के बावजूद जांच में शामिल होने से बच रहे थे। उन्हें मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। हरियाणा सरकार ने आठ अप्रैल को प्रदीप कुमार को निलंबित कर दिया था। इसके अलावा सीबीआई ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन एरिया हेड शमीम अहमद डार और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर चरणजीत सिंह रंधावा को गिरफ्तार कर मंगलवार को अदालत में पेश किया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि दोनों अधिकारियों की भूमिका सरकारी खाते खुलवाने, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लेन-देन को मंजूरी देने और सरकारी धन को शेल कंपनियों तक पहुंचाने में सामने आई है। एचएसपीसीबी के खाते से 187 करोड़ निकलने के अलर्ट आरोपी के पास सीबीआई के अनुसार जांच में सामने आया कि सरकारी विभागों के नाम पर खाते खोलते समय गिरफ्तार बैंक अधिकारियों ने केवाईसी और अन्य अनिवार्य प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन नहीं किया। कई खातों में सरकारी अधिकारियों के बजाय आरोपियों के नियंत्रण वाले मोबाइल नंबर दर्ज किए गए। इससे खातों से संबंधित डेबिट अलर्ट वास्तविक अधिकारियों तक पहुंचने के बजाय आरोपियों को मिलते रहे। जांच में सामने आया कि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के बैंक खाते से जुड़े एक मोबाइल नंबर पर लगभग 187.26 करोड़ रुपये के 47 कथित डेबिट अलर्ट पहुंचे लेकिन वह नंबर विभाग का नहीं बल्कि सह-आरोपी के नियंत्रण में था। शमीम ने जाली खातों के फर्जी दस्तावेज किए सत्यापित सीबीआई ने अदालत को बताया कि शमीम अहमद डार उस समय आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के सरकारी बैंकिंग समूह में एरिया हेड था। जांच में पाया गया कि उसने कई सरकारी विभागों के खाते खुलवाने और उन्हें प्रमाणित करने में अहम भूमिका निभाई। आरोप है कि उसने अधिकारियों और दस्तावेजों के सत्यापन का प्रमाण दिया जबकि बाद में वही खाते जाली दस्तावेजों और फर्जी मोबाइल नंबरों के आधार पर संचालित हुए। रंधावा ने पंचायत विभाग के खाते से 47.51 करोड़ निकाले सीबीआई के मुताबिक एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर चरणजीत सिंह रंधावा ने भी कई संदिग्ध डेबिट ट्रांजेक्शन को मंजूरी दी। जांच में सामने आया कि पंचायत विभाग और हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (एचपीजीसीएल) के कर्मचारी पेंशन फंड ट्रस्ट के खातों से जाली चेक और फर्जी डेबिट नोट्स से रकम निकाली गई। एजेंसी का आरोप है कि पंचायत विभाग के खाते से करीब 47.51 करोड़ रुपये के फर्जी डेबिट में रंधावा की सीधी भूमिका रही। कई मामलों में कॉल-बैक सत्यापन की प्रक्रिया भी ऐसे मोबाइल नंबरों पर पूरी दिखाई गई जो अधिकृत अधिकारियों के नहीं थे। डिजिटल साक्ष्य और पैसे के ट्रेल की होगी जांच सीबीआई के अनुसार दोनों आरोपियों ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर सरकारी पैसा फर्जी कंपनियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराने में भूमिका निभाई। तलाशी के दौरान कई दस्तावेज और निवेश संबंधी रिकॉर्ड भी बरामद किए गए हैं। एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने पूछताछ में सहयोग नहीं किया और मोबाइल फोन से अहम चैट व कॉल रिकॉर्ड हटाने का प्रयास किया। सीबीआई ने अदालत में कहा कि रिमांड के दौरान डिजिटल साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड, पैसे के पूरे ट्रेल, फर्जी कंपनियों तक पहुंचे सरकारी फंड, कथित अवैध लाभ और मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाएगी। एजेंसी अन्य सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की संभावित संलिप्तता की भी जांच कर रही है। अब तक 22 गिरफ्तार, दो आईएएस और आठ बैंक अधिकारी शामिल इस मामले में अब तक 22 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें तीन आईएएस व एक आईएफएस अधिकारी, आठ बैंक अधिकारी व कर्मचारी, चार सरकारी कर्मचारी और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं। गिरफ्तार आईएएस अधिकारियों में पंकज अग्रवाल, राम कुमार सिंह व प्रदीप कुमार शामिल हैं। चंडीगढ़ के आईएफएस अधिकारी नवनीत श्रीवास्तव भी गिरफ्तार हो चुके हैं। एजेंसी ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुल आठ अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। इनमें हाल ही में गिरफ्तार आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन एरिया हेड शमीम अहमद डार और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर चरणजीत सिंह रंधावा प्रमुख हैं। इसके अलावा गिरफ्तार बैंक अधिकारियों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व ब्रांच हेड रिभव ऋषि और पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार भी शामिल हैं। सरकारी कर्मचारियों में एचपीजीसीएल के पूर्व वित्त निदेशक अमित दीवान, पंचायत विभाग का पूर्व सुपरिंटेंडेंट नरेश कुमार और एचएसपीसीबी का डाटा एंट्री ऑपरेटर सौरव शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा विक्रम वाधवा, स्वाति सिंगला, अभिषेक सिंगला और मनीष जिंदल समेत छह निजी व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया है। सीबीआई अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। चार और आईएएस पर गिरफ्तारी की तलवार इस मामले में प्रदीप कुमार से पहले दो आईएएस आरके सिंह व पंकज अग्रवाल गिरफ्तार किए जा चुके हैं। प्रदीप कुमार तीसरे आईएएस जिन्हें इस घोटाले में गिरफ्तार किया गया है। चार और आईएएस पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। ये आईएएस हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड, श्रम विभाग, प्रदूषण विभाग और पंचायत विभाग में बड़े पदो पर रहे चुके हैं। सेवानिवृत्ति के दिन गिरफ्तार हुए प्रदीप कुमार बैंक घोटाले में गिरफ्तार निलंबित आईएएस प्रदीप कुमार मंगलवार को सेवानिवृत्त भी हो गए। राज्य सरकार ने उन्हें 8 अप्रैल को परिवहन विभाग के निदेशक और विशेष सचिव पद से निलंबित किया था। हरियाणा की प्रशासनिक व्यवस्था में यह पहला मामला माना जा रहा है जब कोई आईएएस अधिकारी निलंबन के दौरान सेवानिवृत्त हुआ है। सीबीआई ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन वे जांच में शामिल नहीं हो रहे थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए प्रदीप कुमार ने पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। इस पर वीरवार को सुनवाई होगी। प्रदीप कुमार 2011 में हरियाणा सिविल सेवा से पदोन्नत होकर आईएएस बने थे। अगस्त 2022 से दिसंबर 2025 तक वे हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सदस्य सचिव रहे। नहीं मिलेंगे सेवानिवृत्ति पर मिलने वाले लाभ कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के नियमों के अनुसार, जब किसी सरकारी अधिकारी को निलंबित किया जाता है तो उसे पूरी पेंशन और उससे जुड़े सभी लाभ तुरंत नहीं मिलते। ऐसे अधिकारी को जांच पूरी होने तक केवल अनंतिम (अस्थायी) पेंशन दी जाती है। यह पेंशन निलंबन से पहले मिल रहे मूल वेतन के आधार पर तय की जाती है। इसके अलावा अधिकारी को मिलने वाली कुछ अन्य सुविधाएं जैसे ग्रेच्युटी (सेवानिवृत्ति पर मिलने वाली राशि) और अवकाश नकदीकरण (लीव एनकैशमेंट) भी तुरंत नहीं दी जातीं। इन्हें तब तक रोका जाता है जब तक विभागीय या न्यायिक जांच पूरी नहीं हो जाती। अगर जांच में अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके रिटायरमेंट लाभ कम किए जा सकते हैं या रोके भी जा सकते हैं मगर जांच में वह पूरी तरह निर्दोष साबित हो जाता है तो उसे उसका पूरा वेतन, सभी भत्ते और सभी सेवानिवृत्ति लाभ बिना किसी कटौती के दिए जाते हैं। आईएएस विनीत गर्ग भी जांच के दायरे में एचएसपीसीबी के तत्कालीन चेयरमैन आईएएस विनीत गर्ग भी जांच के दायरे में हैं। प्रदीप कुमार ने आरोप लगाया है कि विनीत गर्ग के निर्देश पर वित्त विभाग की तय सीमा से अधिक राशि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में जमा कराई गई जबकि अन्य बैंकों में बेहतर ब्याज दर उपलब्ध थी। आरोप है कि 50 करोड़ रुपये की निर्धारित सीमा पूरी होने के बाद भी कई चरणों में अतिरिक्त राशि उसी बैंक में निवेश की गई।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 01, 2026, 03:25 IST
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