ICMR: मानसिक बीमारी और नशे के लती लोगों की पहचान करेगा आईसीएमआर का AI एप, बगैर इंटरनेट कैसे करेगा काम?

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने मानसिक स्वास्थ्य और नशे की लत की शुरुआती पहचान के लिए आईसीएमआर-माइंड्स नामक एआई आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया है। इसकी सहायता से प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी गांवों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही लोगों की स्क्रीनिंग कर सकेंगे। एप मरीज की स्थिति का प्रारंभिक आकलन कर उपचार संबंधी सुझाव देता है और गंभीर मामलों को विशेषज्ञों के पास भेजने की सलाह देता है। यह कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है तथा इंटरनेट के बिना भी काम कर सकता है। फिलहाल इसका संचालन देश के सात प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के सहयोग से कई राज्यों में किया जा रहा है। मानसिक बीमारी या नशे की लत से जूझ रहे लोगों को इलाज के लिए अब हर बार बड़े अस्पताल या विशेषज्ञ डॉक्टर के पास नहीं जाना पड़ेगा। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने आईसीएमआर-माइंड्स नाम का एक एआई आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इसकी मदद से आशा कार्यकर्ता और अन्य प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी गांव और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही लोगों की शुरुआती जांच कर सकेंगे। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ राजीव बहल ने कहा कि इस एप को सरकारी सेवाओं में एआई और नई तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में गोल्ड अवॉर्ड मिला है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी आईसीएमआर एआई और आधुनिक तकनीक की मदद से लोगों तक सस्ती, बेहतर और आसान स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की कोशिशें जारी रखेगा। एप मानसिक तनाव, अवसाद, चिंता और नशे की लत जैसी समस्याओं को पहचानने में मदद करेगा। एप मरीज के हालात देख स्वास्थ्यकर्मियों को सुझाव भी देगा। मरीज की हालत गंभीर होने पर उसे विशेषज्ञ डॉक्टर के पास भेजा जा सकेगा, जबकि सामान्य मरीजों का इलाज नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ही किया जा सकेगा। इससे बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम होगा और विशेषज्ञ डॉक्टर गंभीर मरीजों को ज्यादा वक्त दे पाएंगे। वहीं, मरीजों के इलाज बीच में छोड़ने की संभावना भी कम होगी। बगैर इंटरनेट भी करेगा काम इस एप की खास बात यह है कि यह बगैर इंटरनेट के भी काम कर सकता है। यही नहीं, अलग-अलग राज्यों के स्वास्थ्यकर्मियों की सुविधा के लिए एप में कई भारतीय भाषाओं का विकल्प है। फिलहाल यह परियोजना असम, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पंजाब में सात प्रमुख संस्थानों के सहयोग से चलाई जा रही है। इनमें एम्स नई दिल्ली, एम्स गुवाहाटी, एम्स भोपाल, एम्स भुवनेश्वर, सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज बेंगलुरु, गुजरात इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ और पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ शामिल हैं।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 06, 2026, 02:22 IST
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