300 साल पहले विलुप्त डोडो की वापसी की उम्मीद: मदद करेगा निकोबार कबूतर; वैज्ञानिकों ने कैसे खोजा रास्ता?
एजेंसी, श्री विजयपुरम। डोडो पक्षी को विलुप्त हुए 300 साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन अब भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पाया जाने वाला निकोबार कबूतर उसे वापस धरती पर लाने की उम्मीद जगा रहा है। अमेरिकी बायोटेक कंपनी डोडो को फिर से प्राप्त करने में लगी हुई है। डोडो उड़ नहीं सकता था और इंसानों द्वारा किए गए शिकार व बाहरी जानवरों के कारण 17वीं शताब्दी में मॉरीशस से पूरी तरह विलुप्त हो गया था। वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत के निकोबार द्वीप समूह और दक्षिण-पूर्वी एशिया में पाया जाने वाला निकोबार कबूतर डोडो का सबसे करीबी जीवित रिश्तेदार है। ये भी पढ़ें:कूटनीति के टर्निंग पॉइंट बनेंगे पीएम के विदेश दौरे: कनाडा-ईयू से व्यापार समझौतों पर रहेगी नजर; क्या है तैयारी वैज्ञानिकों ने डोडो के डीएनए का लगभग 95% जेनेटिक ब्लूप्रिंट डिकोड कर लिया है। डोडो के विपरीत, निकोबार कबूतर उड़ सकता है और इसके पंख बेहद खूबसूरत, चमकदार हरे और तांबे जैसे रंग के होते हैं। 70 से अधिक जीवित पक्षियों का अध्ययन डोडो के बहुत सारे जेनेटिक सैंपल उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए कंपनी ने एआई से 70 से ज्यादा जीवित पक्षियों की प्रजातियों के विकास का अध्ययन करके लगभग 2,300 ऐसे जेनेटिक टारगेट की पहचान की है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 17, 2026, 05:48 IST
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