अनम्यूट भारत: पंजाब के अमीर कोकीन ले रहे, गरीब सस्ती गोलियों में डूबे; नशे-अपराध के जाल पर और क्या बोले विर्क?
पंजाब का नशा अब अमीरों का शौक नहीं, गरीब घरों की त्रासदी बन चुका है। मेलबर्न में खालिस्तानियों से भिड़कर चर्चा में आए भारत ऑस्ट्रेलिया स्ट्रेटेजिक अलायंस के चेयरमैन डॉ. जगविंदर सिंह विर्क के मुताबिक कोकीन जैसे महंगे नशे अमीर करते हैं, जबकि पंजाब का गरीब तबका सस्ती गोलियों और केमिकल ड्रग्स की गिरफ्त में है। उनका दावा है कि राज्य में नशा करने वालों में 70 प्रतिशत युवा हैं। अमर उजाला के पॉडकास्ट अनम्यूट भारत में विर्क ने नशे की जड़ गांव की आर्थिक हालत में बताई। उनके मुताबिक पंजाब के 80% किसानों के पास 5 एकड़ से कम जमीन है और उनकी महीने की आमदनी 15 हजार रुपये के आसपास है। यही वह तबका है जहां से खिलाड़ी, कुशल कारीगर और फौजी निकलते थे, और यही सबसे ज्यादा नशे में डूबा है। विर्क ने कहा कि पहले पंजाब से बड़ी संख्या में लड़के फौज में जाते थे, अब भर्ती के लिए लड़के नहीं मिल रहे। उनका दावा है कि नशे का असर अगली पीढ़ी पर भी पड़ रहा है और टेस्ट ट्यूब बेबी के सबसे ज्यादा मामले पंजाब में हैं। दिल्ली से आए राजनीति के मगरमच्छों ने पंजाब को तबाह किया. मानसा में नशे के खिलाफ बोलने वाले परविंदर सिंह झोटा की फेसबुक लाइव पर हत्या को लेकर विर्क ने आप सरकार पर निशाना साधा और कहा कि दिल्ली से आए राजनीति के मगरमच्छों ने पंजाब को तबाह कर दिया है। हालांकि उन्होंने माना कि नशा पहले की सरकारों में भी था। नशा ही अपराध की नर्सरी विर्क के मुताबिक नशा ही अपराध की नर्सरी बन गया है। नशे के आदी गरीब लड़कों को 15 से 20 हजार रुपये देकर भाड़े पर लिया जाता है और उनसे गोलियां चलवाई जाती हैं। तरनतारन और अमृतसर से ऐसे सबसे ज्यादा लड़के लिए जाते हैं। पुलिस और तस्करों की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए उन्होंने पंजाबी कहावत दोहराई, कुत्ती चोरां नाल रल्ली होई है, यानी जिसे पहरा देना था वही चोरों से मिल गई। पंजाब में खालिस्तान का समर्थन एक प्रतिशत भी नहीं खालिस्तान पर उनका कहना था कि पंजाब के सिखों में इसका समर्थन एक प्रतिशत भी नहीं, विदेशों के रेफरेंडम चंद लोगों का खेल हैं। विर्क ने कहा कि सिख कैदियों, छोटे किसानों के कर्ज, वसूली और नशे के मसले सुलझ जाएं तो पंजाब बदल जाएगा। झोटा की हत्या की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो मेरा तो एक बेटा चला गया, लेकिन वह ऐसा काम करके गया कि पता नहीं कितने और बेटों को बचा गया। मानसा में परविंदर झोटा के पिता भीम सिंह ने यह कहते हुए बेटे के संघर्ष को याद किया। उन्होंने मांग की कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो और आरोपी को कड़ी सजा मिले। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हत्याकांड के मुख्य आरोपी अश्वनी ने पहले अपने पिता के साथ करियाना दुकान चलाई। अपेक्षित आमदनी नहीं होने पर उसने 2008 में अपने नाम पर फार्मेसी लाइसेंस लेकर घर के पास मेडिकल स्टोर खोला। बाद में दुकान मुख्य बाजार में शिफ्ट कर ली।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 17, 2026, 02:35 IST
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