Kushinagar News: आयुर्वेद क्लीनिक की आड़ में एलोपैथ पद्धति से इलाज

कुशीनगर। सीएमओ कार्यालय और आयुर्वेद विभाग के जिम्मेदारों को झांसा देकर नीम हकीम और झोलाछाप मरीजों का इलाज कर रहे हैं। आयुर्वेद क्लीनिक की आड़ में एलोपैथ पद्धति से इलाज किया जा रहा है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। बांसी में आयुर्वेद क्लीनिक में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद जांच शुरू हुई तो पता चला कि आयुर्वेद विभाग के रिकाॅर्ड में 123 आयुर्वेदिक क्लीनिकों में सिर्फ 33 के ही पंजीकरण का नवीनीकरण हुआ है, बाकी अवैध तरीके से संचालित हैं। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी जांच के लिए पहुंचे तो संचालकों ने कहा कि अब वे एलोपैथ अस्पताल संचालित कर रहे हैं। विशेषज्ञ डाॅक्टर बुलाकर यहां पर इलाज कराते हैं, जबकि सीएमओ कार्यालय में भी इनका पंजीकरण नहीं है। सीएमओ ने आयुर्वेदिक अधिकारी से पंजीकृत क्लीनिकों की सूची मंगाकर सीएचसी अधीक्षकों को भेज दी है। एलोपैथ और आयुर्वेद विभाग की संयुक्त रूप से टीम गठित कर क्लीनिकों की जांच की तैयारी चल रही है। बांसी में संचालित क्लीनिक का पंजीकरण आयुर्वेद विभाग में था, लेकिन मार्च के बाद नवीनीकरण नहीं कराया गया था। क्लीनिक संचालक बिहार की एक स्टाफ नर्स को बुलाकर प्रसव कराता था। छह दिन पूर्व प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की मौत पर हंगामा के बाद संचालक क्लीनिक बंद कर भाग गया। सीएमओ के निर्देश पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्लीनिक पर नोटिस चस्पा कर अपना ताला लगा दिया। एक सप्ताह के अंदर संचालक को जवाब देना था, लेकिन अब तक संचालक ने स्वास्थ्य विभाग की टीम से संपर्क नहीं किया है। घटना के बाद क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी टीम के साथ बिना पंजीकरण के संचालित करीब बीस क्लीनिकों पर पहुंचे। नवीनीकरण के बारे में पूछने पर संचालकों ने बताया कि वे डाॅक्टर बुलाकर एलोपैथ पद्धति से मरीजों का इलाज कराते हैं। इसलिए आयुर्वेद विभाग में पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं कराया है। क्लीनिकों में मेज पर डाॅक्टरों के नाम लिखे पैड मिले। सीएमओ कार्यालय की टीम को आयुर्वेद पद्धति से और आयुर्वेद विभाग के अफसरों को एलोपैथ पद्धति से इलाज का झांसा देकर अवैध तरीके से क्लीनिक संचालित की जा रही है। -पहले भी आ चुके हैं ऐसे मामले-क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी की जांच में पता चला कि आयुर्वेद पद्धति से इलाज के लिए पंजीकरण कराने वाले संचालक एलोपैथ से इलाज कर रहे हैं। ऐसे संचालकों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। योगी क्लीनिक के अलावा फाजिलनगर, कसया, तुर्कपट्टी क्षेत्र में पूर्व में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। इसको लेकर विभाग गंभीर हैं।--जिले में 123 क्लीनिक पंजीकृत थे। मार्च में सभी का पंजीकरण समाप्त हो गया है। अब तक सिर्फ 33 क्लीनिक संचालकों ने पंजीकरण कराया है। नवीनीकरण नहीं कराने वाले क्लीनिक संचालकों को नोटिस दिया जाएगा। पंजीकरण में दर्ज मोबाइल नंबर पर मौखिक जानकारी दी जा चुकी है। जांच के दौरान ये संचालक एलोपैथ पद्धति से इलाज का दावा कर रहे हैं। बांसी की योगी क्लीनिक का पंजीकरण खत्म हो चुका है। इसकी विभागीय स्तर पर जांच चल रही है। -डॉ. जगदीश यादव, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी कुशीनगर-आयुर्वेद विभाग से पंजीकृत क्लीनिकों की सूची मंगाकर सीएचसी अधीक्षकों को भेज दी गई है। पंजीकृत क्लीनिकों का नाम सीएचसी की दीवारों पर लिखवा दिया जाएगा। दोनों विभागों की टीम संयुक्त रूप से जांच कर अवैध तरीके से संचालित क्लीनिकों पर रोक लगाएगी। इसकी तैयारी चल रही है। अवैध अस्पतालों को किसी भी कीमत पर नहीं चलने दिया जाएगा। -डॉ. चंद्रप्रकाश, सीएमओ कुशीनगर

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 26, 2026, 02:49 IST
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