Meerut News: हाईवे पर बस गई आस्था की बस्ती

- जहां तक जाए नजर, वहां तक दिखे शिवभक्त कांवड़िया- राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर दादरी से मोहिउद्दीनपुर तक दिखाई देती है केसरिया छटाशरद गुप्तादौराला (मेरठ)। सुबह की पहली किरण हो या आधी रात का सन्नाटा दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर इन दिनों समय जैसे ठहर-सा गया हो। यहां ट्रकों और बसों के हॉर्न की जगह बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे हैं। डामर की काली सड़क पर केसरिया रंग की ऐसी चादर बिछी है, लगता है मानो हाईवे नहीं, भोलेनाथ की ओर बढ़ता कोई विशाल आस्था पथ हो। आषाढ़ मास से शुरू हुआ यह सिलसिला अब आस्था की ऐसी अस्थायी नगरी का रूप ले चुका है, जहां हर कदम शिवभक्ति में डूबा नजर आ रहा है।इस अस्थायी शहर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां कोई मकान नहीं, फिर भी हजारों लोग ठहरते हैं। कोई स्थायी बाजार नहीं, फिर भी हर जरूरत की चीज उपलब्ध है। पैसे हों या न हों, लेकिन कोई भूखा नहीं सोता। सड़क किनारे लगे सेवा शिविर इस बस्ती की पहचान बन गए हैं। कहीं गर्मा-गर्म भोजन परोसा जा रहा है, कहीं चाय और शरबत से थके कदमों को ऊर्जा मिल रही है। कहीं डॉक्टर छालों पर मरहम लगा रहे हैं तो कहीं स्वयंसेवक कांवड़ की मरम्मत में जुटे हैं। यहां सेवा का कोई मूल्य नहीं, क्योंकि हर श्रद्धालु में भोलेनाथ का स्वरूप देखा जाता है।दिन चढ़ने के साथ कांवड़ियों का कारवां बढ़ता जाता है और रात होते-होते हाईवे का नजारा और भी अलौकिक हो उठता है। जगमगाते शिविर, भजनों की धुन, डमरू की थाप और निरंतर आगे बढ़ते कांवड़ियों के कदम यह एहसास कराते हैं कि आस्था को न दिन रोकता है और न रात। हाईवे चौबीसों घंटे श्रद्धा से गुलजार है। गंगा मेले में तंबुओं की नगरी कुछ दिनों के लिए बसती है, लेकिन कांवड़ यात्रा में राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब 10 से 11 दिनों तक ऐसा शहर आबाद रहता है, जिसकी नींव ईंट-पत्थर पर नहीं बल्कि सेवा, समर्पण और विश्वास पर टिकी होती है। यहां कोई किसी का परिचय नहीं पूछता। हर कोई सिर्फ इतना जानता है कि सामने वाला शिवभक्त है और उसकी सेवा करना ही सबसे बड़ा पुण्य है। (संवाद)55 किमी में सैकड़ों शिविरदादरी से मोहिउद्दीनपुर तक करीब 55 किलोमीटर के हाईवे पर इन दिनों जहां नजर जाती है, वहीं कांवड़ियों का कारवां, सेवा शिविर और अस्थायी दुकानें दिखाई देती हैं। सड़क किनारे जगह-जगह लगे शिविरों में शिवभक्तों की सेवा की जा रही है। भोजन से लेकर रात में सोने तक की व्यवस्था है। जरूरत का सामान बेचने के लिए अस्थायी दुकानें भी हाईवे किनारे लगी हुईं हैं। दूर तक दिखाई देती केसरिया छटा हाईवे को आस्था की नगरी में बदल रही है।मेरठ वालों का बड़ा दिलरोहटा रोड के जैनपुर निवासी दिव्यांग यशवीर बताते हैं कि मेरठ वालों का दिल बड़ा है। वह दिल खोलकर कांवड़ियों की सेवा करते हैं। यही वजह है कि हाईवे पर जिधर नजर डालो, उधर सेवा शिविर दिखाई देता है। मेरठ के लोग शिव भक्तों की दिल खोलकर सेवा करते हैं। यशवीर इस बार छठी बार कांवड़ लेकर लौट रहे हैं। दौराला - दौराला में हाईवे से झांकी वाली कांवड़ लेकर गुजरते कांवड़ियां। स्रोत : संवाद दौराला - दौराला में हाईवे से झांकी वाली कांवड़ लेकर गुजरते कांवड़ियां। स्रोत : संवाद दौराला - दौराला में हाईवे से झांकी वाली कांवड़ लेकर गुजरते कांवड़ियां। स्रोत : संवाद दौराला - दौराला में हाईवे से झांकी वाली कांवड़ लेकर गुजरते कांवड़ियां। स्रोत : संवाद दौराला - दौराला में हाईवे से झांकी वाली कांवड़ लेकर गुजरते कांवड़ियां। स्रोत : संवाद दौराला - दौराला में हाईवे से झांकी वाली कांवड़ लेकर गुजरते कांवड़ियां। स्रोत : संवाद दौराला - दौराला में हाईवे से झांकी वाली कांवड़ लेकर गुजरते कांवड़ियां। स्रोत : संवाद दौराला - दौराला में हाईवे से झांकी वाली कांवड़ लेकर गुजरते कांवड़ियां। स्रोत : संवाद दौराला - दौराला में हाईवे से झांकी वाली कांवड़ लेकर गुजरते कांवड़ियां। स्रोत : संवाद

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 07, 2026, 21:08 IST
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