ईरान पर फिर बरसेगा अमेरिकी बम?: खाड़ी देशों को सता रहा हमले का डर, तेहरान के लिए क्या है ट्रंप की योजना?
अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान के खिलाफ एक बार फिर सैन्य कार्रवाई शुरू हो सकती है। अमेरिकी अधिकारियों ने मध्य पूर्व के कई देशों और क्षेत्रीय सहयोगियों को संभावित हमलों के लिए तैयार रहने को कहा है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो तेहरान भी जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमले को लेकर अंतिम फैसला नहीं लिया है। चुनाव के बाद बढ़ सकता है तनाव दो राजनयिकों के मुताबिक, अमेरिका ने अपने सहयोगियों को बताया है कि सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू होने पर कई दिनों तक चल सकती है। लेकिन चिंता सिर्फ अमेरिकी हमलों की नहीं है। ईरान और उसके समर्थित संगठन जवाबी हमले कर सकते हैं, जिससे संघर्ष लंबा खिंचने का खतरा है। अमेरिकी अधिकारियों ने क्षेत्रीय देशों को तेल ठिकानों और दूसरी जरूरी सुविधाओं की सुरक्षा बढ़ाने की सलाह भी दी है। ईरान ने बातचीत का रास्ता खुला रखा तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश कूटनीति को एक और मौका देने के लिए तैयार है। तेहरान मध्यस्थों के साथ बातचीत कर रहा है और पिछले महीने दिए गए प्रस्ताव के आधार पर युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। हालांकि, ट्रंप पहले ही इस प्रस्ताव को खारिज कर चुके हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने भी दोनों पक्षों से संयम बरतने और राजनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम करने की अपील की है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ाई गई अमेरिकी सैन्य ताकत अमेरिका ने हाल ही में अपने विमानवाहक पोत यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट और कई अन्य नौसैनिक जहाजों को मरीन सैनिकों के साथ फारस की खाड़ी की ओर रवाना किया है। इस तैनाती में करीब 9,000 सैनिक शामिल बताए गए हैं। इससे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी काफी मजबूत हो सकती है। हालांकि, चुनाव के कितने समय बाद अमेरिकी सेना किसी संभावित हमले के लिए पूरी तरह तैयार होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। हूती हमलों ने भी बढ़ाई मुश्किलें मध्य पूर्व में हालात पहले से ही जटिल बने हुए हैं। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल ठिकानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाया है। इसके जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में हूती नियंत्रण वाले इलाकों पर हमले किए हैं। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ने पर कई देश इसकी चपेट में आ सकते हैं। महंगे तेल और युद्ध का राजनीतिक असर ईरान के साथ जारी युद्ध का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और राजनीति पर भी पड़ रहा है। युद्ध के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे आम लोगों की जेब पर दबाव बढ़ा है। पेंटागन के ताजा अनुमान के मुताबिक, इस युद्ध पर अमेरिकी करदाताओं के 47.1 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है, लेकिन साथ ही उन्होंने नए हमलों की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। ये भी पढ़ें: '5000 डॉलर में मार-ए-लागो में सिर्फ बर्गर मिलेगा': महंगाई पर घिरे ट्रंप ने उड़ाया मजाक, समर्थकों ने लगाए ठहाके क्या चुनाव से पहले भी हो सकता है हमला विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान को लगता है कि अमेरिका जल्द हमला करने वाला है, तो वह पहले ही कोई बड़ा कदम उठा सकता है। इससे हालात और बिगड़ सकते हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनाव के बाद ट्रंप सैन्य कार्रवाई का आदेश देते हैं या बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश करते हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के फैसले पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक तेल बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 29, 2026, 04:43 IST
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