चिंताजनक: हर 100 में 7 भारतीयों में भूलने की बीमारी का खतरा, WHO ने वायु प्रदूषण को माना सबसे बड़ा विलेन
भारत तेजी से बुजुर्ग होती आबादी वाले देशों में शामिल हो रहा है। ऐसे में याददाश्त कमजोर होने और डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) का खतरा भी बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पहली बार अपनी नई गाइडलाइन में वायु प्रदूषण (खासतौर पर पीएम 2.5) को डिमेंशिया के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल किया है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि प्रदूषण के संपर्क को कम करने से याददाश्त कमजोर होने के खतरे को कम किया जा सकता है। भारत के लिए यह चेतावनी इसलिए भी अहम है क्योंकि देश के कई शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। साथ ही, भारतीयों में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और स्ट्रोक जैसी बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं, जिन्हें डब्ल्यूएचओ ने डिमेंशिया के प्रमुख कारणों में गिना है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में 2021 तक 5.7 करोड़ लोग डिमेंशिया के साथ रह रहे थे। हर साल करीब 1 करोड़ नए मामले सामने आते हैं। अनुमान है कि यह संख्या 2030 तक 7.8 करोड़ और 2050 तक 13.9 करोड़ पहुंच जाएगी। इनमें 60% से अधिक कम और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं। खतरा और बढ़ने की आशंका भारत में करीब 10.4 करोड़ लोग 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के हैं। विभिन्न भारतीय अध्ययनों के अनुसार, इस आयु वर्ग के करीब 6 से 7 प्रतिशत लोग किसी न किसी प्रकार के डिमेंशिया से प्रभावित हैं। यानी हर 100 भारतीयों में लगभग 6-7 लोगों को यह बीमारी है या उसका खतरा है। आबादी के हिसाब से यह संख्या 60 से 70 लाख के बीच बैठती है और आने वाले वर्षों में इसके और बढ़ने की आशंका है। डब्ल्यूएचओ भी मानता है कि कम और मध्यम आय वाले देशों में डिमेंशिया का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। इन वजहों से भी बढ़ी भूलने की बीमारी डब्ल्यूएचओ के मुताबिक डिमेंशिया केवल बढ़ती उम्र की बीमारी नहीं है। जीवनशैली और पर्यावरण से जुड़े कई कारण इसे बढ़ाते हैं। इनमें वायु प्रदूषण (पीएम2.5), हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन, डिप्रेशन समेत कई कारण शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ ने गाइडलाइन में 2024 लैंसेट कमीशन का हवाला देते हुए कहा है कि डिमेंशिया के करीब 45% मामलों का संबंध ऐसे जोखिम कारकों से है जिन्हें बदला या नियंत्रित किया जा सकता है। यानी अगर लोग समय रहते जीवनशैली सुधारें और सरकारें प्रदूषण सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को मजबूत करें, तो बड़ी संख्या में मामलों को टाला या देर से विकसित किया जा सकता है। पहली बार प्रदूषण पर स्पष्ट सिफारिश डब्ल्यूएचओ ने अपनी दूसरी संस्करण की गाइडलाइन में पहली बार साफ कहा है कि बाहरी वायु प्रदूषण, विशेषकर पीएम 2.5, और घर के अंदर होने वाले प्रदूषण के संपर्क को कम करने से डिमेंशिया का खतरा घट सकता है। हालांकि उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों को अभी सीमित माना गया है, लेकिन डब्ल्यूएचओ ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम बताया है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 18, 2026, 04:40 IST
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