Ground Report: बेरोजगारी और भर्ती घोटाले से नाराज युवा मतदाता करेंगे खेला, ये असंतोष बैलेट बॉक्स तक पहुंचेगा?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा और निर्णायक फैक्टर युवा मतदाता बनकर उभरे हैं। ये चुनाव की दिशा-दशा तय कर सकते हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल मतदाता 6.44 करोड़ हैं। इनमें 1.4 से 1.7 करोड़ युवा (18-29 आयु वर्ग) हैं। 18 से 19 वर्ष के 5.2 लाख से अधिक युवा पहली बार वोट डालेंगे। यानी हर चौथा वोटर युवा है। ऐसे में बेरोजगारी, भर्ती घोटाले, सिस्टम पर भरोसे के संकट से उपजा असंतोष क्या बैलेट बॉक्स तक पहुंचेगा, यही चुनाव का अहम सवाल है। इस बात पर नजर है कि चुनाव युवा असंतोष की कहानी बनेगा या पारंपरिक राजनीतिक संतुलन कायम रहेगा। 2021 के मुकाबले इस बार वोटरों का मिजाज बदला है। पहचान व योजनाओं की जगह रोजगार, पारदर्शिता, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे केंद्र में हैं। विश्लेषकों का मानना है कि युवा मतदाता ज्यादा समस्याओं को देखकर मतदान कर सकते हैं। क्षेत्रवार देखें तो उत्तर बंगाल में रोजगार व पलायन, दक्षिण बंगाल में शिक्षित बेरोजगारी और भर्ती घोटाले, जंगलमहल में स्थायी रोजगार की कमी बड़ा मुद्दा है। ममता बनर्जी योजनाओं के जरिये युवाओं को साधने की कोशिश कर रही। वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विपक्ष बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बना रहा। पश्चिम बंगाल में अभी क्या है मतदाताओं की स्थिति कुल मतदाता : 6.44 करोड़ युवा (18-29) : 1.4-1.7 करोड़ पहली बार वोटर (18–19) : 5.2 लाख से अधिक हिस्सेदारी : 22-26% रोजगार की स्थिति बेरोजगारी दर : 3.6% से 4.3 (स्रोतः पीएलएफएस और सीएमआईई) अन्य आकलन : 7-8% युवा बेरोजगारी : 15-20% ये भी पढ़ें- Ground Report: अभिषेक का इस्पाती तंत्र बनाम शाह की नीति, दक्षिण 24 परगना में सीट नहीं बल्कि साख की लड़ाई बंगाल : हर चौथा वोटर युवा, 5.2 लाख से अधिक मतदाता पहली बार चुनेंगे अपनी सरकार अभ्यर्थी अनिमेष बनर्जी कहते हैं कि हमने परीक्षा देकर वर्षों इंतजार किया, पर नौकरी नहीं मिली। अब वोट ही हमारा तरीका है, अपनी बात कहने का। संदेशखाली के रहने वाले और बंगलूरू में कार्यरत तरुण कहते हैं कि मेरे जैसे युवा बेरोजगार और भ्रष्टाचार के खिलाफ वोट करेंगे। परिवर्तन होकर रहेगा। युवाओं की लगातार बढ़ रही भागीदारी पिछले चुनावों से तुलना करें तो युवाओं की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है। 2011 में यह 20-22% थी, जो 2021 में बढ़कर 24-25% पहुंची। 2026 में 22-26% मानी जा रही। यानी युवा अब सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि चुनावी परिणाम बदलने वाली ताकत हैं। पूरे बंगाल-उत्तर से दक्षिण, जंगलमहल से शहरी इलाकों तक रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। शिक्षक भर्ती से जुड़ा एसएससी विवाद चुनाव में युवाओं के गुस्से का केंद्र है। 26 हजार नियुक्तियां रद्द होने और लंबे समय तक चले आंदोलनों ने युवाओं में गहरा असंतोष पैदा किया है। देखना है कि चुनावी समीकरणों में बंटकर नाराजगी के इन आंकड़ों का असर सीमित तो नहीं रह जाएगा।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 19, 2026, 05:38 IST
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