Una News: जलभराव वाली भूमि बनेगी आय का साधन

ऊना। मत्स्य पालन विभाग ऊना के सहायक निदेशक विवेक शर्मा ने बताया कि जिला ऊना के निचले क्षेत्रों में बरसात के दौरान जलभराव की समस्या रहती है, जिसके कारण किसान वर्ष में केवल एक फसल ही ले पाते हैं। ऐसी भूमि को अब मत्स्य पालन के लिए उपयोग में लाकर किसान बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। वैज्ञानिक तरीके से किया गया मछली पालन पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक लाभदायक साबित हो रहा है और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि का माध्यम बन सकता है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत जिला ऊना में चालू वित्त वर्ष के दौरान नए तालाबों के निर्माण, मछली बीज एवं फीड की व्यवस्था तथा मछली उत्पादों के सुरक्षित परिवहन के लिए 40 से 60 प्रतिशत तक वित्तीय अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य किसानों, युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए मत्स्य पालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करना है। योजना के अंतर्गत सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को परियोजना लागत पर 40 प्रतिशत तथा आरक्षित वर्गों एवं सभी वर्गों की महिलाओं को 60 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है। इससे सीमित संसाधनों वाले किसान भी कम लागत में इस व्यवसाय की शुरुआत कर सकेंगे। तालाब निर्माण के साथ पहले वर्ष के बीज और फीड पर भी सहायता दी जा रही है। उपज को बाजार तक पहुंचाने के लिए परिवहन वाहन पर भी अनुदान का प्रावधान भी योजना में शामिल किया गया है। इसके तहत आइस बॉक्स युक्त मोटरसाइकिल तथा आइस बॉक्स युक्त थ्री-व्हीलर की खरीद पर भी 40 से 60 प्रतिशत तक के अनुदान का प्रावधान है। योजना के तहत ग्रामीण महिलाएं अपने घर के आंगन या उपलब्ध स्थान पर बैकयार्ड सजावटी (ऑर्नामेंटल) मछली पालन इकाई स्थापित कर सकती हैं। इस इकाई की स्थापना के लिए भी महिलाओं को 60 प्रतिशत तक विशेष अनुदान दिया जा रहा है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 14, 2026, 00:10 IST
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