चुनाव से पहले सुलगा PoK: मुजफ्फराबाद कूच से पहले पुलिस की गोली से नौ मरे, खूनी झड़प के बाद राजधानी की घेराबंदी

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पाकिस्तान सरकार के खिलाफ चल रहा आंदोलन, जन आक्रोश में बदल गया है। ज्वॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के बुधवार को प्रस्तावित मुजफ्फराबाद मार्च से पहले पूंछ डिवीजन में प्रदर्शनकारियों और पुलिस एवं पाकिस्तान रेंजर्स की रातभर हुई हिंसक झड़पों में नौ लोगों की मौत हो गई। क्षेत्रीय तनाव बढ़ा इस हिंसा में पाकिस्तान रेंजर्स के दो जवानों की भी मौत हुई है। घटना को लेकर प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के दावे अलग-अलग हैं, लेकिन पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। हजारों प्रदर्शनकारी आज रावलकोट, मीरपुर, कोटली, बाग और अन्य जिलों से मुजफ्फराबाद की ओर कूच करेंगे, जबकि पाकिस्तान प्रशासन ने राजधानी मुजफ्फराबाद में अभूतपूर्व सुरक्षा घेरा तैनात कर दिया है। पीओके के गृह सचिव चौधरी गुफ्तार हुसैन के हवाले से पाकिस्तानी अखबार डॉन ने खबर दी है कि प्रशासन किसी दबाव में नहीं आएगा और जेएएसी के आंदोलन को निर्ममता से कुचल दिया जाएगा। पुलिस के अनुसार सुधनोती जिले के बलोच इलाके में सुरक्षाबलों के काफिले पर पहले प्रदर्शनकारियों ने फायरिंग की, जिसमें रेंजर्स के एक जवान की मौत हुई। वहीं जेएएसी समर्थकों का आरोप है कि गोलीबारी की शुरुआत सुरक्षाबलों ने की। सुरक्षा काफिला कोटली सरसावा से बलोच की ओर बढ़ रहा था, तभी सारन और बलोच गांवों के पास ग्रामीणों ने उसका रास्ता रोक दिया और इसके बाद हिंसक टकराव शुरू हो गया। मार्च से पहले पूरे क्षेत्र में आंदोलन तेज हो गया है। आठ जिलों में बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं। रावलकोट के बाहरी इलाके में हजारों समर्थक कई दिनों से डेरा डाले हुए हैं। पूरा घटनाक्रम ऐसे समय हो रहा है जब 27 जुलाई को पीओके की 45 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान होना है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले भड़का यह आंदोलन पाकिस्तान सरकार के लिए हाल के वर्षों की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती बन गया है। 12 आरक्षित सीटों को लेकर भड़के लोग जेएएसी की सबसे प्रमुख मांग विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को समाप्त करने की है। संगठन का आरोप है कि इन सीटों के जरिये पाकिस्तान की मुख्यधारा की पार्टियां उन लोगों के वोट से मुजफ्फराबाद में सरकार बनवाती हैं जो पीओके में रहते ही नहीं हैं। जून में पीओके के सुप्रीम कोर्ट ने इन सीटों को सांविधानिक संरक्षण प्राप्त बताते हुए कहा था कि इन्हें केवल विधायी संशोधन के जरिये ही बदला जा सकता है। अदालत के इस फैसले के बाद आंदोलन और भड़क गया। प्रतिबंध के बाद तेज हुआ आंदोलन पांच जून को पाकिस्तान सरकार ने जेएएसी को आतंकवाद निरोधक कानून के तहत प्रतिबंधित घोषित कर दिया था। प्रशासन का आरोप है कि संगठन हथियार जमा कर रहा था और सुरक्षाबलों पर हमले की योजना बना रहा था। जेएएसी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताया है। मई के अंत में सरकार और संगठन के बीच बातचीत टूटने के बाद से हालात लगातार बिगड़ते गए हैं।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 15, 2026, 05:34 IST
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