मेरा गांव, मेरी शान: पाकस्मा गांव से निकले आजाद हिंद फौज के सिपाही, पेश की बहादुरी की मिसाल
रोहतक के पाकस्मा आजादी की लड़ाई से लेकर देश की सरहदों की हिफाजत तक हर दौर में कुर्बानियों की मिसाल रहा है। यहां से निकले जांबाजों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में शामिल होकर अंग्रेजी हुकूमत को ललकारा था। इन सपूतों ने देश के लिए और मातृभूमि की रक्षा में समर्पित कर दिया था। पाकस्मा का इतिहास बलिदान और देशभक्ति से लिखा गया है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान गांव के मनोहर, भरतू, ठेका, बलदेव, नफे, बाजेराम और लायक आजाद हिंद फौज का हिस्सा बने। इन स्वतंत्रता सेनानियों ने नेताजी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भारत की आजादी के लिए संघर्ष किया। यही नहीं गांव के स्वतंत्रता सेनानी भरत सिंह पुत्र ज्ञानी के जर्मनी में निधन के बाद गांव में पार्थिव शरीर तक नहीं पहुंचा था।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 09, 2026, 19:36 IST
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