CEA Data: कम EV रजिस्ट्रेशन के बादजूद चार्जिंग में दिल्ली इनसे आगे; नए रिपोर्ट में खुली इंफ्रास्ट्रक्चर की पोल
दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का राष्ट्रीय रजिस्ट्रेशन में हिस्सा सिर्फ 6% है, लेकिन पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों (PCS) पर बिजली खपत में इसकी हिस्सेदारी 24% है। अप्रैल–नवंबर 2025 के दौरान देशभर में 993 मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली ईवी चार्जिंग में खर्च हुई, जिसमें अकेले दिल्ली ने 240 मिलियन यूनिक उपयोग किया। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि देश की राजधानी में पब्लिक चार्जिंग पर निर्भरता ज्यादा है। जबकि चार्जिंग पॉइंट्स की कमी भी सामने आई है। कम ईवी, फिर भी इन राज्यों खपत ज्यादा ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री के मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवे के वाहन डैशबोर्ड और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में अप्रैल-नवंबर 2025 के बीच पीसीएस पर कुल खपत 993 (24 प्रतिशत) एमयू रही। महाराष्ट्र में 227 एमयू यानि की 22.9 प्रतिशत, कर्नाटक में 138 एमयू मतलब 13.9 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 131 एमयू करीब 13.2 प्रतिशत खपत हुई। इसका मतलब है कि दिल्ली में कुल ईवी रजिस्ट्रेशन करीब 4.8 लाख है, जो राष्ट्रीय कुल का करीब 6% है। इसके विपरीत उत्तर प्रदेश 15.2 लाख ईवी के साथ सबसे आगे है। ये भी पढ़े:SIAM:एसयूवी का दबदबा बरकरार, जनवरी में पैसेंजर कार बिक्री 5% घटी, कार सेगमेंट पर दबाव बिक्री में तेजी, चार्जिंग में उछाल पिछले वर्ष यानि 2025 की बात करें तो भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ी है। सालभर में 23 लाख से ज्यादा ईवी बिके, जो कुल नए वाहनों की बिक्री का करीब 8 प्रतिशत हिस्सा है। इस बढ़ती बिक्री का सीधा असर चार्जिंग नेटवर्क पर भी दिखाई दे रहा है। अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच मासिक ईवी चार्जिंग बिजली खपत 33 प्रतिशत बढ़कर 143 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई। वहीं, पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों पर कुल बिजली खपत 52 प्रतिशत की बड़ी छलांग लगाते हुए 515 एमयू से बढ़कर 993 एमयू हो गई। ये आंकड़े बताते हैं कि देश में ईवी अपनाने की रफ्तार तेज हो रही है और इसके साथ ही पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है। दिल्ली में चार्जिंग पॉइंट्स की भारी कमी भले ही दिल्ली बिजली के उपयोग में सबसे आगे है, लेकिन शहर में चार्जिंग सुविधाओं की अभी भी बड़ी कमी है। दिल्ली में फिलहाल 8,998 क्रियाशील चार्जिंग पॉइंट्स हैं, जबकि अनुमानित आवश्यकता 36,177 की है। यह 302 प्रतिशत का घाटा दिखा रहा है कि जैसे-जैसे और चार्जिंग पॉइंट्स जुड़ेंगे, बिजली की मांग में और अधिक वृद्धि होगी। एक्सपर्ट्स का मानना है दिल्ली में निजी पार्किंग और घरेलू चार्जिंग की सीमित सुविधा के कारण लोग पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों पर ज्यादा निर्भर हैं, जिससे बिजली खपत का आंकड़ा ऊंचा दिखता है। ये भी पढ़े:EV: दिल्ली में ईवी चार्जिंग की कमी, एनसीआर में और बुरा हाल, क्या समय पर पूरा होगा 16 हजार पॉइंट्स का लक्ष्य क्या ईवी इकोसिस्टम पर दबाव बढ़ सकता है हां, एक्सपर्ट्स के अनुसार, सरकार नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ईवी को बढ़ावा दे रही है, लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि अगर चार्जिंग नेटवर्क का तेजी से विस्तार नहीं हुआ, तो शहरी इलाकों में ईवी इकोसिस्टम पर दबाव बढ़ सकता है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 14, 2026, 08:11 IST
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