US: अदालत ने डाक मतदान मामले पर खींची सरकार की लगाम, आदेश पर लगाई रोक; जानें जज ने ट्रंप पर क्या टिप्पणी की
अमेरिका में चुनावी प्रक्रिया को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। एक संघीय अदालत ने वाशिंगटन और ओरेगन में डाक द्वारा मतदान से जुड़े ट्रंप प्रशासन के कार्यकारी आदेश के अधिकांश प्रावधानों पर रोक लगा दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ट्रंप प्रशासन मतदान नियमों को सख्त करने की कोशिशों में जुटा हुआ था। सिएटल स्थित अमेरिकी जिला न्यायाधीश जॉन एच. चुन ने साफ कहा कि राष्ट्रपति को चुनावों को नियंत्रित करने का अधिकार नहीं है। ट्रंप प्रशासन नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण अनिवार्य करना चाहता था। सभी मतपत्रों को चुनाव दिवस तक प्राप्त करने की शर्त रखी गई थी। अदालत ने माना कि ये प्रावधान राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। ये भी पढ़ें-वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका की सीधी पकड़, ट्रंप ने आदेश पर किए हस्ताक्षर; जानें ऊर्जा नीति में क्या बदलेगा न्यायाधीश ने ट्रंप पर क्या टिप्पणी की जज ने अपने आदेश में कहा कि चुनावों को विनियमित करने का अधिकार केवल राज्यों और कांग्रेस के पास है। संविधान शक्तियों के पृथक्करण की बात करता है। कोई भी राष्ट्रपति एकतरफा चुनाव नियम तय नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे आदेश लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ हैं। राज्यों ने अदालत में क्या दलील दी वाशिंगटन और ओरेगन ने अलग-अलग मुकदमा दायर किया। दोनों राज्य केवल डाक द्वारा मतदान प्रणाली अपनाते हैं। उनका कहना था कि कार्यकारी आदेश से उन्हें सीधा और विशेष नुकसान होता। इससे पहले 19 राज्यों ने मैसाचुसेट्स में इसी तरह का केस दायर किया था, जिसमें भी ट्रंप को झटका लगा था। ये भी पढ़ें-आर-पार की लड़ाई के मूड में ईरानी जनता:दो हफ्ते बाद भी नहीं थमी बगावत खामेनेई की चेतावनी के बावजूद विरोध जारी अनुदान रोकने पर भी अदालत की सख्ती एक अन्य मामले में संघीय जज अरुण सुब्रमण्यन ने ट्रंप प्रशासन को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि बच्चों की देखभाल और जरूरतमंद परिवारों से जुड़े कार्यक्रमों की फंडिंग नहीं रोकी जा सकती। कैलिफोर्निया, कोलोराडो, इलिनोइस, मिनेसोटा और न्यूयॉर्क ने शिकायत दर्ज कराई थी। इन राज्यों का कहना था कि फंड रोकने से तुरंत नुकसान हुआ है। ट्रंप प्रशासन के लिए क्यों अहम है यह फैसला यह फैसला ट्रंप के उन प्रयासों पर सवाल खड़े करता है, जिनके जरिए वह चुनावी नियमों और संघीय फंडिंग पर ज्यादा नियंत्रण चाहते थे। अदालतों के लगातार हस्तक्षेप से साफ है कि अमेरिकी न्यायपालिका राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमा तय करने में सक्रिय भूमिका निभा रही है। अन्य वीडियो-
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 11, 2026, 05:53 IST
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