Crude Oil Prices Hike: पश्चिम एशिया में हमलों के बाद तेल कीमतों में तेज उछाल, वैश्विक आपूर्ति पर संकट गहराया
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर हमलों तथा उसके जवाबी हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया। बाजार खुलते ही ट्रेडर्स ने आशंका जताई कि क्षेत्र से तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे कीमतों में और तेजी आ सकती है। 8 प्रतिशत तक चढ़ा अमेरिकी कच्चा तेल अमेरिका में उत्पादित हल्का और मीठा कच्चा तेल वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो शुक्रवार के 67 डॉलर के स्तर से करीब 8 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़े तो यह उछाल जारी रह सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा जोखिम पश्चिम एशिया के तनाव का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर दिख रहा है। यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी का प्रवेश द्वार है, जहां से प्रतिदिन लगभग 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा है। इस मार्ग से सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान का तेल और गैस विश्व बाजार तक पहुंचता है। ये भी पढ़ें:-OPEC+ Boosts Oil Production:पश्चिम एशिया में जंग से तेल बाजार गरम, कच्चे तेल के दाम में $20 तक उछाल की आशंका हाल ही में इस मार्ग से गुजर रहे दो जहाजों पर हमले की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस जलमार्ग में आवाजाही सीमित होती है तो कई देशों की निर्यात क्षमता प्रभावित होगी, जिससे वैश्विक स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि तय मानी जा रही है। OPEC+ ने उत्पादन बढ़ाने का किया ऐलान तनाव के बीच राहत देने की कोशिश में OPEC+ समूह के आठ देशों ने कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की है। अप्रैल से 2,06,000 बैरल प्रतिदिन अतिरिक्त उत्पादन किया जाएगा। उत्पादन बढ़ाने वाले देशों में सऊदी अरब, रूस, इराक, यूएई, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान शामिल हैं। हालांकि ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, जब तक निर्यात मार्ग पूरी तरह सुरक्षित न हो जाएं। ईरान के निर्यात पर भी संकट ईरान प्रतिदिन करीब 16 लाख बैरल तेल निर्यात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा चीन को जाता है। यदि निर्यात बाधित होता है तो चीन जैसे बड़े आयातक देशों को वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं, जिससे वैश्विक मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पश्चिम एशिया तेल आपूर्ति संकट का असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, महंगाई दर और शेयर बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 02, 2026, 07:21 IST
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