त्रिकुटा पर्वत के दो रहस्य: दुनिया को मिली एलियम जम्मूनेंस और जम्मू-कश्मीर में पहली बार दिखा दुर्लभ हरा सांप
माता वैष्णो देवी के पावन त्रिकुटा पर्वत ने कुदरत के दो ऐसे दुर्लभ रहस्य दुनिया के सामने रखे हैं, जिसने विज्ञान जगत में हलचल मचा दी है। रियासी जिले के इस पहाड़ से शोधकर्ताओं ने एक साथ दो ऐतिहासिक वैज्ञानिक उपलब्धियां हासिल की हैं। पहली- वनस्पति जगत में जम्मू के नाम पर दुनिया की सर्वथा नई पादप प्रजाति एलियम जम्मूनेंस (जंगली प्याज) की खोज और दूसरा- जम्मू-कश्मीर के सरीसृप इतिहास में पहली बार अति दुर्लभ हरा सांप नेपाल पिट वाइपर की उपस्थिति। यह सांप कैमरे में कैद हुआ है। शोधकर्ता डॉ. सुनीत सिंह चौहान जम्मू विश्वविद्यालय में पोस्ट डॉक्टरल एवं फेलो हैं और आयुष मंत्रालय से मान्यता प्राप्त हैं। वे वनस्पति विज्ञान विभाग में प्रोजेक्ट फेलो जुड़े हैं। उनके अनुसार अब तक अंतरराष्ट्रीय वनस्पति मानचित्र पर कश्मीर के नाम से तो कई प्रजातियां दर्ज थीं, लेकिन जम्मू संभाग की कोई अधिकृत वानस्पतिक पहचान नहीं थी। इस कमी को दूर करने के लिए उन्होंने अपनी मेंटॉर प्रो. नम्रता शर्मा और तत्कालीन विभागाध्यक्ष प्रो. सुशील वर्मा के मार्गदर्शन में शोध शुरू किया। इसी दौरान रियासी के पौनी इलाके में हल्के हरे-सफेद रंग के टेपल्स वाला जंगली प्याज/लहसुन (जीनस एलियम कुल) का एक अनोखा पौधा दिखाई दिया। इस अहम सुराग के बाद शोध दल ने विच्छेदन उपकरणों और सिलिका जेल के साथ दोबारा क्षेत्र का दौरा कर बीज व पौधे के ताजे नमूने जुटाए। शोध दल के अन्य सदस्यों उदय शर्मा और साजन ठाकुर के साथ जब इसकी आणविक (डीएनए) स्तर पर जांच की गई तो यह दुनिया के अन्य सभी ज्ञात एलियम से पूरी तरह भिन्न निकला। अंततः उत्तराखंड के वैज्ञानिक डॉ. अनंत कुमार के साथ दो रातों तक चले गहन विश्लेषण के बाद इस नई प्रजाति की डायग्नोस्टिक कुंजी तैयार की गई। नाम में छिपी जम्मू की पहचान डॉ. सुनीत ने बताया कि पौधे का नामकरण अंतरराष्ट्रीय वनस्पति नियमों (आईसीएन) के अनुरूप करने के लिए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी हर्बेरिया के विश्वविख्यात नामकरण विशेषज्ञ डॉ. कांची गांधी से तकनीकी सलाह ली गई। सिक्किम में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान उनसे यह चर्चा हुई, जिसके बाद नई प्रजाति का नाम एलियम जम्मूनेंस तय किया गया। एमारिलिडेसी कुल के शीर्ष अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ डॉ. रॉब डेविड स्मिसन ने इस शोध की गहन समीक्षा की। अंततः तीन कड़े वैज्ञानिक परीक्षणों (पियर रिव्यू) से गुजरने के बाद प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका न्यूजीलैंड जर्नल ऑफ बॉटनी (विले) ने इसे वैश्विक स्तर पर आधिकारिक मान्यता दी। संयोग से देवी पिंडी ट्रैक पर मिला अद्भुत हरा सांप त्रिकुटा पर्वत से जुड़ा दूसरा रहस्य देवी पिंडी ट्रैक की शुरुआत में सामने आया। शोधकर्ता जब अपने परिवार और दोस्तों के साथ यहां गए थे, तब रास्ते में एक खड़ी चढ़ाई पर बोहेमेरिया (रिआ) नामक पौधे की पत्तियों के बीच अचानक एक दुर्लभ और चमकीला हरा सांप दिखाई दिया। बाद में जब इन तस्वीरों को साथी शोधकर्ता तसलीमा शेख के साथ साझा किया गया तो उन्होंने इसके वैज्ञानिक महत्व को पहचाना और विस्तृत अध्ययन के लिए प्रेरित किया। उच्च-गुणवत्ता वाली तस्वीरों और रूपात्मक विश्लेषण के आधार पर विशेषज्ञों ने इसे जम्मू-कश्मीर के हर्पेटोफौना (सरीसृप वर्ग) में एक ऐतिहासिक और नए रिकॉर्ड के तौर पर मान्यता दी। जांच में स्पष्ट हुआ कि यह नेपाल पिट वाइपर है। इससे पहले यह प्रजाति केवल नेपाल और उत्तराखंड में ही देखी गई थी, जम्मू-कश्मीर में इसकी उपस्थिति पहली बार दर्ज हुई है। एक अलग पहचान एक ही भौगोलिक क्षेत्र से सामने आए इस दोहरी खोज ने विश्व स्तर पर जम्मू संभाग को एक अलग पहचान दिलाई है। शोधकर्ताओं का मानना है कि त्रिकुटा पर्वत से एक साथ पादप और प्राणी जगत की इन दो विलक्षण खोजों का सामने आना कोई सामान्य घटना नहीं है। यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि आस्था के इस पावन केंद्र की त्रिकुटा घाटी प्राकृतिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी बेहद समृद्ध और रहस्यमयी हैं।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Sep 04, 2026, 00:33 IST
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