Sun Corona Heat: सूरज की भीषण गर्मी का खुला रहस्य, कोरोना में छिपी चुंबकीय तरंगें बना रहीं लाखों डिग्री तापमान

सूरज की बाहरी परत यानी कोरोना आखिर लाखों डिग्री तक गर्म क्यों रहती है, यह सवाल दशकों से वैज्ञानिकों के लिए बड़ी पहेली बना हुआ था। अब भारतीय वैज्ञानिकों के नए अध्ययन ने इस रहस्य को समझने की दिशा में बड़ा संकेत दिया है। शोध में पता चला है कि कोरोना में मौजूद चुंबकीय तरंगें और उनसे पैदा होने वाली सूक्ष्म अशांति वहां की असामान्य गर्मी की बड़ी वजह हो सकती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये तरंगें बिना बड़े गैसीय प्रवाह के भी ऐसे संकेत पैदा करती हैं, जिन्हें पहले केवल तेज प्लाज्मा प्रवाह से जोड़ा जाता था। इस अध्ययन को भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। भारतीय वैज्ञानिकों ने आखिर क्या खोज निकाली यह शोध आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका द एस्ट्रोफिज़िकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों ने पाया कि कोरोना में मौजूद चुंबकीय हाइड्रोडायनामिक तरंगें लगातार ऊर्जा पैदा करती रहती हैं। आसान भाषा में समझें तो यह तरंगें चुंबकीय संरचनाओं को उसी तरह हिलाती हैं जैसे हवा में रस्सी लहराती है। इन्हीं तरंगों से पैदा हुई हलचल कोरोना को अत्यधिक गर्म बनाए रखने में मदद करती है। सूरज का कोरोना इतना गर्म क्यों माना जाता है सामान्य रूप से किसी भी ऊर्जा स्रोत से दूर जाने पर तापमान कम हो जाता है। लेकिन सूरज में इसका उल्टा होता है। सूरज की दिखाई देने वाली सतह यानी फोटोस्फेयर की तुलना में उसके ऊपर मौजूद कोरोना कई गुना ज्यादा गर्म होता है। वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर कोरोना तक इतनी ऊर्जा कैसे पहुंचती है। इस नए अध्ययन में पता चला कि कोरोना के भीतर मौजूद तरंगें और घनत्व की असमानताएं ऊर्जा को लगातार फैलाती रहती हैं, जिससे वहां तापमान लाखों डिग्री तक बना रहता है। सिमुलेशन में वैज्ञानिकों को क्या नया पता चला शोधकर्ताओं ने तीन-आयामी कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए कोरोना के व्यवहार को समझने की कोशिश की। इसमें चुंबकीय क्षेत्रों और घनत्व की अलग-अलग स्थितियों को मॉडल में शामिल किया गया। वैज्ञानिकों ने नीचे से ऊपर की ओर तरंगें भेजकर देखा कि रोशनी और ऊर्जा कैसे व्यवहार करती है। अध्ययन में लोहे के आयन से बनने वाली विशेष स्पेक्ट्रल रेखा एफई-13 10749 ए का विश्लेषण किया गया। सिमुलेशन में पाया गया कि कोरोना के भीतर तरंगें एक समान गति से नहीं चलतीं, बल्कि घनत्व बदलने के कारण उनकी चाल भी बदलती रहती है। इससे लाल और नीले रंग के असंतुलित संकेत पैदा होते हैं। इस खोज से विज्ञान को क्या फायदा होगा वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज केवल सूरज को समझने तक सीमित नहीं रहेगी। इससे अंतरिक्ष मौसम, सौर तूफानों और पृथ्वी पर उनके प्रभाव को समझने में भी मदद मिल सकती है। भविष्य में इससे उपग्रह संचार, अंतरिक्ष मिशनों और सौर ऊर्जा से जुड़े शोध को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। यह अध्ययन भारतीय वैज्ञानिकों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 24, 2026, 02:56 IST
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