हिमाचल: स्पीति में कुत्तों ने बदल दी जंगल की घड़ी, देर रात ज्यादा सक्रिय हो रही लाल लोमड़ी; जानें विस्तार से
हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी की ऊंची और ठंडी पहाड़ियों में वन्यजीवों की दुनिया की घड़ी इंसानी दखल के साथ बदलती नजर आ रही है। जंगल में मौजूद आवारा कुत्तों और बढ़ती मानव गतिविधियों का असर अब वन्यजीवों के रहने के साथ-साथ उनके सक्रिय होने के समय पर भी दिखाई दे रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के शोधकर्ताओं प्रियंका जस्टा और साल्वाडोर लिंगडोह ने स्पीति घाटी में अध्ययन कर यह समझने की कोशिश की कि मानव गतिविधियों और अलग-अलग मांसाहारी जीवों की मौजूदगी हिम तेंदुए, हिमालयी भेड़िये और लाल लोमड़ी के व्यवहार को किस तरह प्रभावित करती है। यह शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल वाइल्डलाइफ बायोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने स्पीति के अलग-अलग क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाकर लंबे समय तक वन्यजीवों की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया। 205 कैमरों ने 8,119 दिन तक दर्ज की वन्यजीवों की हलचल शोधकर्ताओं ने स्पीति घाटी के चंद्रताल, किब्बर, पिन घाटी, माने और ग्यू क्षेत्रों में कुल 205 कैमरा ट्रैप लगाए। निगरानी दो चरणों में की गई। पहला चरण 25 अगस्त 2021 से 29 अप्रैल 2022 तक चला, जबकि दूसरा चरण 25 मई 2022 से 14 अगस्त 2022 तक चला। इस दौरान कुल 8,119 कैमरा-दिन का आंकड़ा जुटाया गया। कैमरों में लाल लोमड़ी के 770, आवारा कुत्तों के 220, हिम तेंदुए के 161 और हिमालयी भेड़िये के 79 रिकॉर्ड दर्ज हुए। इन रिकॉर्ड के आधार पर शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि अलग-अलग मांसाहारी जीव किन क्षेत्रों को पसंद करते हैं और एक-दूसरे या इंसानों की मौजूदगी में उनकी गतिविधियों के समय में किस तरह बदलाव आता है। कुत्ते आए तो लाल लोमड़ी ने बदल दिया रात का समय अध्ययन का सबसे दिलचस्प पहलू लाल लोमड़ी और आवारा कुत्तों के बीच दिखाई देने वाला संबंध है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जिन क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी थी, वहां लाल लोमड़ी रात के शुरुआती हिस्से में अपेक्षाकृत कम सक्रिय रही। इसके बजाय उसकी गतिविधियां रात के बाद के हिस्से में ज्यादा दिखाई दीं। शोधकर्ताओं ने इसे समय के स्तर पर दूरी बनाने की संभावित रणनीति के रूप में देखा है। आसान भाषा में कहें तो लाल लोमड़ी और कुत्ते एक ही इलाके में मौजूद होने के बावजूद एक ही समय पर सक्रिय होने से बच सकते हैं। इस तरह के व्यवहार से दोनों के बीच सीधे टकराव और भोजन को लेकर प्रतिस्पर्धा की संभावना कम हो सकती है। यानी इलाके की जगह वही रहने के बावजूद गतिविधियों का समय बदलकर लाल लोमड़ी अपने लिए अलग समय चुन रही है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Sep 21, 2026, 07:18 IST
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