के-ब्यूटी का काला सच: मृतकों की त्वचा से चमक रहे चेहरे, अब अमेरिका पहुंचेगा दक्षिण कोरिया का जादुई इंजेक्शन
किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि अमेरिका के सैन एंटोनियो जैसे किसी छोटे से शहर में निधन के बाद अंग/टिश्यू दान करने वाले किसी व्यक्ति की त्वचा हजारों मील दूर दक्षिण कोरिया की किसी हाई-टेक लैब में पहुंचकर चेहरे की झुर्रियां मिटाने वाले ब्यूटी इंजेक्शन में तब्दील हो जाएगी। दुनियाभर में के-ब्यूटी और स्किन बूस्टर' के नाम से मशहूर इस नए ब्यूटी ट्रेंड के पीछे का कड़वा सच यही है। अमेरिकी नागरिकों के मरने के बाद दान की गई त्वचा को दक्षिण कोरियाई बायोटेक कंपनियां प्रोसेस करके तरल इंजेक्शन्स में ढाल रही हैं, जिससे चेहरे तुरंत चमकदार और युवा बनने का दावा किया जाता है। दक्षिण कोरिया के सौंदर्य बाजार में इस साल स्किन-डेरिव्ड इंजेक्शन्स का कारोबार 75 मिलियन डॉलर यानी करीब 712 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और बायोएथिक्स विशेषज्ञ एना इल्टिस कहती हैं, जो लोग अपने परिजनों की मृत्यु के बाद शरीर के अंग या ऊतक दान करते हैं, उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं होता कि इस आड़ में कितना भारी पैसा एक हाथ से दूसरे हाथ में घूम रहा है। टिश्यू डोनेशन के नाम पर अरबों डॉलर का कारोबार चल रहा है। दुनियाभर में पहले ही मचा रखी है धूम एलएंडसी बायो अब तक इस ब्यूटी इंजेक्शन की 7,00,000 से अधिक इकाइयां सिंगापुर, चीन, यूएई, पेरू और थाईलैंड जैसे देशों में बेच चुकी है। कंपनी अब चेहरे के दूसरे हिस्सों के लिए इंसान की चर्बी से बना नया फिलर भी बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। अमेरिका के साथ एलएंडसी का 570 करोड़ का करार दक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी कंपनी एलएंडसी बायो ने अब अमेरिका के साथ 60 मिलियन डॉलर (करीब 570 करोड़ रुपये) का पांच साल का करार किया है। इससे शवों की त्वचा से बना यह ब्यूटी प्रोडक्ट फिर अमेरिकी बाजार में बेचा जा सकेगा। दक्षिण कोरियाई बाजार में इस समय री2ओ नामक ब्रांड का एकतरफा दबदबा है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 60% से 70% है। एलएंडसी बायो ने इस साल की पहली छमाही में री2ओ की बदौलत करीब 17 मिलियन डॉलर से ज्यादा की बिक्री दर्ज की, जिससे कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 11 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया। अमेरिका से कोरिया तकटिश्यू की तस्करी या वैध व्यापार दक्षिण कोरियाई सरकारी रिकॉर्ड्स की जांच से पता चला है कि कोरिया को अपनी जरूरत का लगभग 90% मानव टिश्यू अमेरिका से आयात करना पड़ता है। दक्षिण कोरिया में 4% से भी कम वयस्क अंग दान के लिए पंजीकृत हैं, जबकि अमेरिका में आधे से ज्यादा आबादी इसके लिए रजिस्टर्ड है। अमेरिका में ऑर्गन प्रोक्योरमेंट ऑर्गनाइजेशन मरणोपरांत त्वचा एकत्र करते हैं और इसे टिश्यू बैंकों को बेचते हैं। अमेरिकी टिश्यू बैंक इस त्वचा को कोरियाई कंपनियों को प्रोसेस करने के लिए ट्रांसफर करते हैं। इस्तेमाल पर विवाद : अमेरिकी नागरिक जलने के शिकार मरीजों या युद्ध में घायल सैनिकों की मदद के लिए जो त्वचा दान करते हैं उसका इस तरह सौंदर्य प्रसाधनों में व्यावसायिक इस्तेमाल होना चिकित्सा नैतिकता पर बड़ा सवाल है।
#World #International #SouthKorea #KBeauty #SkinBoosters #HumanSkin #TissueDonation #BeautyInjections #LCBio #Re2o #BeautyIndustry #MedicalEthics #VaranasiLiveNews
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 23, 2026, 05:06 IST
के-ब्यूटी का काला सच: मृतकों की त्वचा से चमक रहे चेहरे, अब अमेरिका पहुंचेगा दक्षिण कोरिया का जादुई इंजेक्शन #World #International #SouthKorea #KBeauty #SkinBoosters #HumanSkin #TissueDonation #BeautyInjections #LCBio #Re2o #BeautyIndustry #MedicalEthics #VaranasiLiveNews
