सोमवती अमावस्या: सुहागिनों ने अखंड सौभाग्य का रखा व्रत, पीपल वृक्ष की 108 बार की परिक्रमा; चढ़ाया तिल और गुड़
Varanasi News:अधिकमास में 30 साल बाद सोमवती अमावस्या पर बने दुर्लभ संयोग में सोमवार को भक्तों ने भगवान शिव और विष्णु की आराधना की। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान, दान-पुण्य और पितरों का तर्पण किया तो सुहागिनों ने अखंड सौभाग्य के लिए पीपल के वृक्ष की पूजा कर 108 परिक्रमा की। गुड़, तिल, फल, फूल आदि चढ़ाकर पूजा की। काशी के पौराणिक कुंडों, तालाबों और स्थलों पर पूजन और पितरों के तर्पण कर लोगों ने गया और प्रयाग का फल प्राप्त किया। कपिलधारा पर इस दिन पितरों के तर्पण का विशेष विधान होने से वहां भीड़ रही। भगवान पुरुषोत्तम को समर्पित अधिकमास में सोमवती अमावस्या का पड़ना उत्तम माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु, शिव और पितरों के पूजन-अर्चन का विधान है। इस बार पुरुषोत्तमी अमावस्या पर दुर्लभ और पवित्र संयोग होने से खासकर सुहागिनों ने देर रात में ही शिव मंदिरों और पीपल के वृक्ष की पूजा शुरू कर दी। उन्होंने पीपल के वृक्ष पर जल, गुड़, तिल, फल, किशमिश, पान, सुपारी आदि अर्पित किया। प्रभु का नाम स्मरण कर वृक्ष में कच्चा धागा लपेटते हुए 108 बार परिक्रमा लगाई। मान्यता है कि पीपल वृक्ष की पूजा करने और उसके चारों ओर परिक्रमा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है और दांपत्य जीवन सुखमय होता है। कॉलोनियों और मोहल्लों में लगे पीपल के पेड़ के नीचे पूजा के लिए महिलाओं की भीड़ रही।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 15, 2026, 23:14 IST
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