Kalka: 11वीं सदी की हैं काली माता मंदिर से निकलीं शिव मूर्ति-चक्रनुमा शिलाएं, प्रतिहार शैली की है मूर्तियां

कालका के प्राचीन श्री काली माता मंदिर में खोदाई कार्य के दौरान निकली पुरानी शिव मूर्ति और चक्रनुमा शिलाएं 11वीं सदी की हैं। ये मूर्तियां प्रतिहार शैली के समय की हैं। ये अवशेष भारत की प्राचीन मूर्तिकला को दर्शा रहे हैं। यह सभी मंदिर के अवशेष हैं। 11वीं सदी में यहां पर एक विशाल मंदिर रहा होगा। इन तथ्यों की पुष्टि पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग में उप निदेशक डॉ. नरेंद्र परमार ने की। वह शुक्रवार को प्राचीन श्री काली माता मंदिर का दौरा करने पहुंचे थे। उन्होंने मंदिर में जहां खोदाई का काम लगा था उसका बारीकी से निरीक्षण किया। उप निदेशक ने मंदिर में खोदाई कार्य के दौरान निकली मूर्तियों ओर चक्रनुमा शिला का भी गहनता से जांच की। उन्होंने बताया कि खोदाई के दौरान भगवान शिव की जो मूर्ति मिली है उसे चैतमुख या कीर्तिमुख कहा जाता है। मंदिर में से मिली चक्रनुमा शिला मंदिर के शिखर का एक हिस्सा है, जिसे आमलक कहा जाता है, इसे मंदिर के शिखर पर स्थापित किया जाता है। इस हिस्से को आमला फल के नाम पर आमलक कहा जाता है क्योंकि आमला में कुछ परतें होती हैं और यह आमला से मिलता-जुलता है। बड़े आकार की चक्रनुमा शिलाएं आमतौर पर आमलक के ठीक नीचे पाई जाती है जोकि सहायक वृत्त के रूप में कार्य करती है। यह उस काल में मंदिर के गुंबद रहे होंगे।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 14, 2026, 05:05 IST
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