Lucknow News: जैन धर्म के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले सात विद्वान सम्मानित

लखनऊ। गोमतीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के सभागार में बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश जैन विद्या संस्थान के 35वें स्थापना दिवस पर बृहस्पतिवार को सम्मान समारोह हुआ। मुख्य अतिथि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने जैन धर्म व संस्कृति के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले देश के सात विद्वानों को सम्मानित किया।संस्थान के निदेशक संस्थान के निदेशक अमित कुमार अग्निहोत्री ने बताया कि एक लाख रुपये का तीर्थंकर ऋषभदेव सम्मान बड़ौत के डॉ. श्रेयांश कुमार जैन को दिया गया। इसके अलावा 51 हजार रुपये का तीर्थंकर महावीर अहिंसा सम्मान मुंबई के प्रो. शुद्धात्म प्रकाश जैन को, 51 हजार का आचार्य कुन्द कुन्द सम्मान मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा के डॉ. विवेक जैन को, 51 हजार का ही युगल चेतना सम्मान भोपाल के हेमचंद जैन को, 31 हजार रुपये पर भरत चक्रवर्ती सम्मान झांसी के डॉ. पुनीत जैन को, 21 हजार रुपये का श्री गणेश प्रसाद वर्णी श्रुत आराधक सम्मान मैनपुरी के कुरावली की नेहा जैन को और 21 हजार रुपये का ही श्रुत संवर्धन सम्मान ललितपुर स्थित बानपुर के डॉ. विकास जैन को दिया गया।संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. अभय कुमार जैन ने बताया कि संस्थान ने प्रदेश के 18 तीर्थंकरों की जन्म स्थानों पर आयोजन कर अहिंसा और अनेकांत सिद्धांतों द्वारा विश्व शांति का संदेश पहुंचाया। शाकाहार और सदाचार का प्रचार प्रसार किया। हर साल सात विद्वानों को सम्मानित किया जाता है। संस्थान में स्नातक पाठ्यक्रम तैयार कर जल्द ही कक्षाएं प्रारंभ करने की दिशा में प्रयास जारी हैं।संस्थान के निदेशक अमित कुमार अग्निहोत्री ने बताया कि राज्य ललित कला ऐकेडमी के 20 विद्यार्थियों ने महावीर भगवान की पेंटिंग बनाईं। निबंध प्रतियोगिता में छात्र अंकित को प्रथम, अद्विका को द्वितीय व अभिनव को तृतीय स्थान मिला। पेंटिंग प्रतियोगिता में आकृति को प्रथम, वर्तिका को द्वितीय व तमन्ना को तृतीय स्थान मिला। सभी को पुरस्कार दिए गए।मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि आप कुछ बना नहीं पा रहे हैं तो कम से कम पुरखों के दिए अमानत को अगली पीढ़ी के लिए संजोएं। तीन बहनों ने ऑनलाइन गेम की वजह से आत्महत्या कर ली। यह युवा पीढ़ी के लिए खतरनाक है। बच्चों और अभिभावकों को इससे सचेत होने की जरूरत है। प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करना मानव जीवन के लिए खतरनाक है। जरूरी है कि प्रकृति को उसी स्वरूप में रहने दें। जीवन जीने की सच्ची कला महावीर के सर्वाेदय सिद्धांतों को ग्रहण करने से मिलती है। प्राचीन धरोहर और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में काम हो रहा है। उत्तर प्रदेश जैन विद्या संस्थान के 35वें स्थापना दिवस पर बृहस्पतिवार को सम्मान समारोह हुआ।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 06, 2026, 03:28 IST
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